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हरित क्रांति की मशाल जला रहा इटावा सफारी, मौसम की पहली बारिश ने बढ़ाई वर्षा जल संरक्षण की उम्मीदें

Thu, 25 Jun 2020 04:14 PM IST
शिखा पांडेय सुनील कुमार मिश्र, अमर उजाला, इटावा
सुनील कुमार मिश्र, अमर उजाला, इटावा Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 25 Jun 2020 04:14 PM IST
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Etawah Safari, first rain of the season raised hopes of conserving rainwater
इटावा सफारी में बारिश के पानी से भरे तालाब - फोटो : अमर उजाला
इटावा सफारी हरित क्रांति की मशाल जला रहा है। दरअसल, 110 साल पहले बनवाए गए चेकडैम की मरम्मत और सफारी के अंदर वर्षा जल संचयन के तालाब बनाकर बीहड़ की जमीन को उपजाऊ करने का प्रयास सफल होता नजर आ रहा है।
Etawah Safari, first rain of the season raised hopes of conserving rainwater
इटावा सफारी में बारिश के पानी से भरे तालाब - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को हुई मौसम की पहली बारिश में सफारी के तालाब लबालब भरे तो जल स्तर में सुधार आने की उम्मीदें भी बढ़ गईं। इटावा सफारी के निदेशक वीके सिंह ने बताया कि यमुना से सटे होने की वजह से बारिश का पानी नदी में चला जाता था। इससे बीहड़ का यह इलाका उपजाऊ नहीं बन पा रहा था।
Etawah Safari, first rain of the season raised hopes of conserving rainwater
इटावा लायन सफारी - फोटो : अमर उजाला
यहां बड़े-बड़े टीलों और कटीले जंगलों के अलावा कुछ नहीं था। बारिश का पानी रोककर जल स्तर में सुधार लाने के लिए सफारी के खाली जगहों का उपयोग करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग के लिए यहां 8000 घनमीटर के 31 चेकडैम, 8800 सेमी के आठ तालाब बनाए गए। इस प्रोजेक्ट पर पिछले साल काम शुरू हुआ था। मंगलवार को हुई तेज बारिश में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। बारिश का ज्यादातर पानी इन तालाबों में भरा जो अभी तक ठहरा हुआ है।
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Etawah Safari, first rain of the season raised hopes of conserving rainwater
इटावा लायन सफारी - फोटो : amar ujala
शहरी आबादी को भी मिलेगा फायदा
वीके सिंह का कहना है कि सफारी बीहड़ और इटावा शहर से बीच में बना है। यहां से शहर की दूरी करीब ढाई किलोमीटर है। वाटर रिचार्जिंग से शहर और आसपास के जलस्तर में सुधार आएगा। पेयजल का संकट दूर होने के साथ आसपास के किसानों को भी फायदा पहुंचेगा। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रहा है। इसमें सुधार करके आधुनिक तकनीकी से वाटर रिचार्जिंग के लिए शोधकर्ताओं और अन्य विभागों की मदद ली जा रही है।
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इटावा लायन सफारी
ब्रिटिश सरकार के समय बनवाए गए थे चेकडैम
निदेशक वीके सिंह ने बताया कि बीहड़ की जमीन को उपजाऊ बनाने का प्रयास अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुआ था। करीब 110 साल पहले अंग्रेजों ने इस इलाके में बारिश का पानी रोकने के लिए यमुना के आसपास तीन चेकडैम बनवाए थे। आजादी के बाद उपेक्षा के शिकार हुए डैम टूट गए। इन डैम की मरम्मत करवाकर इसका भी सदुपयोग किया जा रहा है।
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