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इटावा: लॉयन सफारी में गूंजी शावकों की किलकारी, जेसिका ने दो बच्चों को दिया जन्म, आंख खुलने पर धूमधाम से मनेगा जश्न
Sat, 12 Dec 2020 07:29 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 12 Dec 2020 07:29 PM IST
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लॉयन सफारी में गूंजी शावकों की किलकारी
- फोटो : अमर उजाला
इटावा में लॉयन सफारी में नन्हें शावकों की आवाज से खुशियां बिखर गईं। 105 दिन के इंतजार के बाद शुक्रवार आधी रात को शेरनी जेसिका ने दो बच्चों को जन्म दिया। सफारी प्रशासन फिलहाल शेरनी और बच्चों की देखरेख में जुटा है। करीब 10 दिन बाद बच्चों की आंख खुलने पर शेरनी को बाहर लाया जाएगा।
लॉयन सफारी
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान धूूमधाम से जश्न मनाने की तैयारी है। सफारी के निदेशक राजीव मिश्रा ने बताया कि जच्चा और बच्चे स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि शावकों का नामकरण ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि साढे़ तीन माह पहले शेर मनन से जेसिका की मेटिंग कराई गई थी। तभी से जेसिका की निगरानी और देखभाल चल रही थी।
लॉयन सफारी
- फोटो : अमर उजाला
प्रसव के लिए तीन कमरे का अलग सेट बनाया गया था। सप्ताह भर से जेसिका इसी विशेष कक्ष में रह रही थी। उसके खाने आराम करने और प्रसव के लिए अंधेरा कमरा बनाया गया था। शुक्रवार रात 12:08 बजे जेसिका ने पहले बच्चे को जन्म दिया। इसके करीब एक घंटे बाद 1:13 बजे दूसरा शावक जन्मा।
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लॉयन सफारी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि बच्चा अस्वस्थ होने या उनका असामान्य व्यवहार होने पर अमूनन शेरनी बच्चे को खुद से दूर कर देती है, लेकिन जेसिका ने प्रसव के कुछ देर बाद ही दोनों शावकों को दूध पिलाना शुरू कर दिया। इससे साफ है कि दोनों शावक स्वस्थ हैं।
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लॉयन सफारी
- फोटो : अमर उजाला
आंख खुलने के बाद पता चलेगा नर या मादा
सफारी के उप निदेशक सुरेश चंद्र राजपूत ने बताया कि जेसिका की देखभाल के लिए अलग केयर टेकर नियुक्त किया गया था। इस वक्त उसके बाड़े तक वही जा सकता है लेकिन बच्चों को छूने या उनके पास जाने पर शेरनी के व्यवहार में परिवर्तन आने का खतरा है। इसलिए बच्चों की आंख खुलने तक करीब 10 दिन तक इंतजार किया जाएगा। इसके बाद उन्हें बाहर लाने पर पता चलेगा की शावक नर हैं या मादा। उन्होंने बताया कि जेसिका के खानपान में बदलाव करके उसे बीफ की जगह अब हल्का चिकन, मटन और सूप दिया जाएगा। दो सप्ताह तक वह यही खाना खाएगी।
सफारी के उप निदेशक सुरेश चंद्र राजपूत ने बताया कि जेसिका की देखभाल के लिए अलग केयर टेकर नियुक्त किया गया था। इस वक्त उसके बाड़े तक वही जा सकता है लेकिन बच्चों को छूने या उनके पास जाने पर शेरनी के व्यवहार में परिवर्तन आने का खतरा है। इसलिए बच्चों की आंख खुलने तक करीब 10 दिन तक इंतजार किया जाएगा। इसके बाद उन्हें बाहर लाने पर पता चलेगा की शावक नर हैं या मादा। उन्होंने बताया कि जेसिका के खानपान में बदलाव करके उसे बीफ की जगह अब हल्का चिकन, मटन और सूप दिया जाएगा। दो सप्ताह तक वह यही खाना खाएगी।