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सीएसए और आईआईटी कानपुर मिलकर दोगुनी करेंगे किसानों की आय, ये भी होगा फायदा
Sun, 13 Jan 2019 11:36 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 13 Jan 2019 11:36 AM IST
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आईआईटी कानपुर और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
प्रदेश के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आईआईटी कानपुर और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिकों ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थानों की तरफ से इस बाबत विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अनुसार सीएसए के वैज्ञानिक किसानों की समस्याएं चिह्नित करेंगे जिसे आईआईटी के वैज्ञानिक तकनीक की मदद से दूर करने का काम करेंगे।
शनिवार को इस बाबत सीएसए और आईआईटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर प्रमुख सचिव कृषि को रिपोर्ट सौंपी है। सीएसए के कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने बताया कि खेती में काफी तरह की विविधिताएं होती हैं। सबकी अलग-अलग समस्याएं भी रहती हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक ऐसी समस्याओं को चिह्नित करके आईआईटी की मदद से उसे दूर करने का काम करेंगे। दोनों संस्थानों के बीच इस बाबत समझौता हुआ है।
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शनिवार को इस बाबत सीएसए और आईआईटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर प्रमुख सचिव कृषि को रिपोर्ट सौंपी है। सीएसए के कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने बताया कि खेती में काफी तरह की विविधिताएं होती हैं। सबकी अलग-अलग समस्याएं भी रहती हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक ऐसी समस्याओं को चिह्नित करके आईआईटी की मदद से उसे दूर करने का काम करेंगे। दोनों संस्थानों के बीच इस बाबत समझौता हुआ है।
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
इन समस्याओं को किया गया है चिह्नित
- मॉडर्न कृषि उपकरणों के बारे में जानकारी का अभाव
- तकनीक को किसानों की तरफ से जल्द स्वीकार न करना
- हाईटेक तकनीक का सही उपयोग न कर पाना
- मिट्टी, पानी, प्रोडक्शन, प्रोडक्टिविटी, कीटनाशक आदि का डाटा काफी पुराना है
- उत्पाद को बेचने के लिए उचित बाजार का उपलब्ध न होना।
आईआईएम लखनऊ तैयार करेगा आंकड़े
आईआईएम लखनऊ ने भी इस प्रोजेक्ट में आईआईटी और सीएसए के साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया है। आईआईएम के विशेषज्ञ किसानों के लिए आंकड़े तैयार करेंगे। इसके अलावा चिह्नित समस्याओं को दूर करने के लिए भी कार्यशालाएं आयोजित कराई जाएंगी।
- मॉडर्न कृषि उपकरणों के बारे में जानकारी का अभाव
- तकनीक को किसानों की तरफ से जल्द स्वीकार न करना
- हाईटेक तकनीक का सही उपयोग न कर पाना
- मिट्टी, पानी, प्रोडक्शन, प्रोडक्टिविटी, कीटनाशक आदि का डाटा काफी पुराना है
- उत्पाद को बेचने के लिए उचित बाजार का उपलब्ध न होना।
आईआईएम लखनऊ तैयार करेगा आंकड़े
आईआईएम लखनऊ ने भी इस प्रोजेक्ट में आईआईटी और सीएसए के साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया है। आईआईएम के विशेषज्ञ किसानों के लिए आंकड़े तैयार करेंगे। इसके अलावा चिह्नित समस्याओं को दूर करने के लिए भी कार्यशालाएं आयोजित कराई जाएंगी।