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बिकरू कांड में अब तक का सबसे चौंकाने वाला खुलासा, काफी समय से रची जा रही थी बिकरू कांड की साजिश
Tue, 06 Oct 2020 10:35 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 06 Oct 2020 10:35 AM IST
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
बिकरू में हुए हत्याकांड की साजिश काफी समय पहले से रची जा रही थी। इसमें एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर, विधायक, खनन माफिया भी शामिल थे। इस बात का खुलासा अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बिकरू कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग के सामने किया। उन्होंने हत्याकांड से जुड़े कुछ ऑडियो-वीडियो भी जल्द आयोग को सौंपने की बात कही।
विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ ने आयोग को दिए शपथपत्र में कहा है कि जांच में फंसे तत्कालीन डीआईजी व पुलिस अधिकारियों तथा जय बाजपेई का नार्को ब्रेन मैपिंग, लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया जाए। सौरभ ने आयोग को विकास दुबे, उसके खजांची जय बाजपेई व उसके गिरोह के सदस्यों द्वारा खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा भी सौंपा।
गैंगस्टर जय बाजपेई और विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड की दाखिल चार्जशीट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने के कुछ घंटे बाद विकास दुबे के खास राम सिंह ने दरोगा केके शर्मा को फोन किया था। उसने पुलिस की कार्रवाई का पूरा अपडेट और हालात के बारे में जानकारी ली थी। तब उसको पता चला था कि गोली कांड में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। दरोगा से बात करने के बाद उसका मोबाइल बंद हो गया था।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
पुलिस की विवेचना के मुताबिक सीडीआर से पता चला कि दो जुलाई शाम को चार बजे सबसे पहले आरोपी दरोगा केके शर्मा की विकास दुबे से बातचीत हुई थी। इसके कुछ ही देर बाद केके शर्मा ने राम सिंह को फोन किया। फिर रात करीब 11 बजे केके शर्मा ने राम सिंह को कॉल की। इस बीच एक कॉल थाने के मुंशी ने आरोपी हीरू दुबे को की। फिर विकास पर एफआईआर दर्ज होने के बाद रात 12:11 मिनट पर विकास की सिपाही राजीव से बातचीत हुई।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
इसकी कॉल रिकॉर्डिंग भी वायरल हुई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वारदात के बाद रात ढाई व साढ़े तीन बजे राम सिंह ने फिर केके शर्मा को कॉल की और शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई की उसको पूरी जानकारी दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास दुबे ही नहीं उसका पूरा गिरोह पुलिस के संपर्क में था। दरोगा, सिपाही और थानेदार सभी उसके कारखास रहे हैं।