उन्नाव के बांगरमऊ क्षेत्र में एक ही सिरिंज से इंजेक्शन लगाकर लोगों को एचआईवी बांटने वाले झोलाछाप के बारे में स्वास्थ्य महकमे को सात महीने पहले ही जानकारी मिल गई थी। इसके बाद भी विभाग सोता रहा। उसके खिलाफ कार्रवाई तब की गई, जब इलाके के 38 लोग एचआईवी की चपेट में आ गए। यह खुलासा खुद सीएमओ ने किया है।
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7 महीने साेता रहा विभाग, लाेग हाेते रहे एचअाईवी जैसी लाइलाज बीमारी के शिकार
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 10 Feb 2018 07:36 PM IST
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बांगरमऊ के प्रेमगंज मोहल्ले के कुछ लोगों ने 13 जुलाई 2017 को जिला अस्पताल के आईसीटी सेंटर में एचआईवी की जांच कराई थी। इसमें पांच लोग एचआईवी से पीड़ित मिले थे। काउंसिलिंग में लोगों ने इलाके में झोलाछाप के सक्रिय होने और एक ही सिरिंज का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत की थी। इस बाबत तत्कालीन सीएमएस डा. एसपी चौधरी ने तत्कालीन सीएमओ डा. राजेंद्र प्रसाद को पत्र लिखा था।
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इसके बाद भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और मामला दब गया। ऐसे में झोलाछाप एक के बाद एक को एचआईवी वायरस देता रहा। 23 नवंबर 2017 को प्रेमगंज में लगे जांच शिविर में एचआईवी पाजिटिव वाले 13 मरीज मिलने के बाद महकमा सक्रिय हुआ। दो डिप्टी सीएमओ ने मामले की जांच की तो भी झोलाछाप का नाम सामने आया।
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मामले के तूल पकड़ने के बाद शिविर लगाकर जांच तेज की गई तो 24 जनवरी से 28 जनवरी के बीच एचआईवी के 38 मरीज सामने आए। इसके बाद दो साल का आंकड़ा देखा गया तो एचआईवी पीड़ितों की संख्या 76 निकली। तब जाकर झोलाछाप राजेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई, फिर गिरफ्तारी हुई। इस समय वह जेल में हैं।
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सीएमओ डा. एसपी चौधरी ने बताया झोलाछाप के खिलाफ शिकायत मिली थी। उस समय मैं सीएमएस था। तत्कालीन सीएमओ को जानकारी दी थी। झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई कराने की जिम्मेदारी उनकी थी। सीएमओ का चार्ज संभालते ही मैंने तीन शिविर लगवाए। इलाके के लोगों को जागरूक करने का लगातार प्रयास कर रहा हूं।