पिछले साल गठित हुए जीएसटी विभाग में पहला ऐसा मामला सामने आया जिसने सीबीआई तक को हैरान कर दिया। कानपुर के जीएसटी कमिश्नर संसारचंद ने अपनी पोजीशन का सिर्फ दुरुपयोग ही नहीं किया बल्कि आर्थिक रूप से इसका जमकर फायदा उठाया। भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने जीएसटी कमिश्नर संसार चंद और उसकी पत्नी समेत 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश की है।
1986 बैच के आईआरएस अफसर संसारचंद पिछले साल गठित जीएसटी विभाग के पहला ऐसा अधिकारी है जो भ्रष्टाचार मामले में फंसा है। सीबीआई जांच में उस पर अपने अधीनस्थ अफसरों के साथ मिलकर जीएसटी में राहत देने के नाम पर सुनियोजित तरीके से व्यापारियों से माहवार और हर तिमाही रिश्वत लेने का आरोप सही पाया गया है।
कानपुर के एक व्यापारी से 1.5 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में संसारचंद को दो फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उनकी पत्नी को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। दो फरवरी की रात ही कानपुर और दिल्ली में एक साथ हुई कार्रवाई के दौरान जीएसटी विभाग के दो सुपरिंटेंडेंट अजय श्रीवास्तव और आरएस चंदेल के अलावा निजी कर्मी सौरभ पांडे को पकड़ा गया था। उनके साथ-साथ पांच अन्य लोग भी पकड़े गए जिसमें शिशु सोप एंड केमिकल्स लिमिटेड का मालिक मनीष शर्मा भी शामिल था।
सीबीआई के अनुसार रिश्वत की रकम को हवाला के लिए दिल्ली भेजा गया जहां से अमन जैन और चंद्र प्रकाश उस पैसे को संसारचंद की पत्नी को पहुंचाते थे। एक ऐसे ही मामले में संसार चंद ने मनीष से रिश्वत की रकम में बढ़ोतरी की बात की। मनीष सेंट्रल एक्साइज विभाग से मिले नोटिस से राहत चाहते थे और उन्होंने दलाल अमित अवस्थी और सुपरिंटेंडेंट अजय श्रीवास्तव के जरिए संसारचंद को आश्वस्त किया था कि वे फरवरी से अप्रैल 2018 तक की तिमाही रिश्वत जल्द पहुंचाएंगे।
उनकी ओर से उनके निजी सचिव सौरभ पांडे ने मनीष के कर्मचारी से 1.5 लाख रुपये हासिल किए। जांच में यह भी पता चला कि संसारचंद और उसकी पत्नी अविनाश कौर ने अपने और रिश्तेदारों के लिए व्यापारियों से कीमती वस्तुओं की मांग की। उनकी गिरफ्तारी के वक्त चले सर्च अभियान के दौरान 58 लाख रुपये कैश और डायरियां, पेन ड्राइव और करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए थे।