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राजू श्रीवास्तव बोले, एक्कै बात कहे चाहित है..होली पे मेलेनिया भौजी रुकतीं तो गुझिया बनाव सीख जउवतीं
Mon, 09 Mar 2020 07:54 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 09 Mar 2020 07:54 PM IST
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राजू श्रीवास्तव, मेलानिया ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला
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दोस्तों कल दुपहरिया मा हमाय मोहल्ले के नत्थूलाल चिल्लावत रहैं.. बताइये साहब.. हमरा तखत गायब है.. हद आय भ्रष्टाचार की!.. हम कहा चाचा एमा भ्रष्टाचार कहां से आय गवा.. तो कहिन अरे घूम फिरि के एके जिम्मेदार भ्रष्ट नेता ही हैं.. फिर शाम का होलिका दहन मा वहै तखत जलत भये देखि के बोले-यार देखे मा तो ई हमरा तखत लागि रहा.. बताव अईस बड़े वाले आंय हमार मोहल्ले के लौंडे.. अच्छा होली मा सबसे जादा परेसान होत हैं जानवर लोगे.. कुत्ता बिल्ली गाय सांड़.. काहे से सबसे पहिले कलर केर ट्राई उनहेन पर होत है
राजू श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
जानवर लोगे सोचत होईं कि कऊन सा दिन हमाई जिंदगी मा घुसिगा.. आज के दिन सबै रंगे पुते चेहरे देखौ.. खाली आँखे अउर दांत चमकत हैं.. जइसे कौनो निग्रो होय.. अंधेरे मा देखौ तो लगत है जइसे दुई बलब अउर झालर जलि रही होंय.. अच्छा रंगे पुते होय का फायदौ आय.. केहू के हिंया जाय के एक बार रंगे भये गुझिया मालपुआ खाय आव.. फिर रंग उतारि के एक राउंड अउर पेल देव.. कोऊ पहिचाने ना पहिये.. ई है मजा होली का.. ई आजकल के ट्रेडमिल पे आपन तेल निकाले वाले मेट्रो सिटी के प्राणी का जाने होली की मौज
राजू श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
ई लोगे तो त्यौहार वाले दिन भी मिठाई पकवान छोड़ि के हरे पत्ते अउर सलाद खावत हैं.. ई लोगे बॉडी फैट.. फैटबर्निंग.. कोलेस्ट्राल.. लो केलोरी डाइट.. कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज की दुनिया से बाहरै नाही आना चाहत.. हमका याद आय बचपन मा हम दद्दा के साथे गंगा मेला जात रहन तो बहुत कुछ अड़गम बडगम खात पियत रहन.. बरफ वाला मक्कू.. गैस वाला सोडा वाटर बोतल जेमा कंचा होत रहा.. जब ओका खोलौ तो ठक्क सानी आवाज आत रही.. इमली.. चूरन.. चाट पकौड़ी.. लइया चना केर भेलपूड़ी.. खाजा.. गजक.. पेठा.. सब कुछ पेट के अन्दर.. कौनो डर नाही.. ना हाइजीन का ना फैट का.. अउर कोलेस्ट्राल तो गवा तेल ले.. पहिले होली के पंद्रह बीस दिन पहिले से तैयारी होत रही
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राजू श्रीवास्तव
अब तो सब बाजार से आवत है.. सब आधुनिक हुई गे.. अच्छा जो होली खेलत है ओकी तो मौज आय.. मगर जो लोगे होली नाही खेलत हैं.. उनके लिए तो जइसे आज बाहर कर्फ्यू लाग है.. उई कहत हैं कि बहुतै बेकार त्यौहार आय.. कीचड़ उड़ावत हैं.. नाले मा घुसेड़ देत हैं.. गोबर ग्रीस अउर सिल्वर पोत देत हैं.. खैर ई बात तो सही आय.. आपन पारंपरिक तरीके से रंग अबीर अउर गुलाल से होरी खेलव.. अच्छा एक बात हमरे समझि मा नाही आवत है कि होली वाले दिन होली खेलत भये सब पंचे ई काहे चिल्लावत हैं कि ‘होली है.. होली है’।
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Raju Srivastav
अउर कौनो त्यौहार पे नाही चिल्लावत कि ‘दिवाली है.. दसहरा है.. नागपंचमी है.. ईद है.. बकरीद है.. क्रिसमस है.. लोहड़ी है’.. खाली होलीयै पे काहे चिल्लावत हैं कि होली है.. सबका याद काहे दिलावत हैं कि कहूँ कोऊ होली वाले दिन धोखे से दिवाली ना मना ले?.. ई बात समझि मा नाहि आवत.. आज होली के दिन सबै टीवी चैनल अउर न्यूज़ चैनल होली के रंग मा रंग जात हैं.. आज के दिन कुछ बुद्धिजीवी टाइप के लोग पानी बचावे का ज्ञान पेलत हैं.. आज होली के दिन कौनो गली नुक्कड़ पे चले जाव.. हुंवा डीजे पे होली का राष्ट्रीय गीत जरूर सुनिहौ.. ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे’.. ई गाने के बिना होली केर त्यौहार अधूरा आय.. हमाय मोहल्ले मा एक संगीता भौजी रहत हैं।