कानपुर के यतीमखाना पर पहले तो पुलिसवालों को गुलाब के फूल दिए गए। इसके थोड़ी देर बाद ही उन पर पथराव शुरू हो गया। राहगीर जान बचाकर भागे। पुलिस उन्हें बचाने के बजाय खुद बचने के लिए भागती नजर आई।
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कानपुर में नागरिकता कानून का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
जुमे की नमाज के बाद प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए सुबह से ही पुलिस-प्रशासन सक्रिय था। करीब 11 बजे एसएसपी अनंत देव और डीएम विजय विश्वास पंतएकता चौकी पर पहुंचे। दोपहर करीब 12 बजे एडीजी प्रेम प्रकाश और कमिश्नर भी वहां पहुंच गए।
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अफसरों ने पुलिसकर्मियों को दिशा-निर्देश दिए। नमाज अदा होने से पहले 1:20 बजे एडीजी फोर्स के साथ मार्च करते हुए यतीमखाना मस्जिद की तरफ जायजा लेने पहुंचे। नमाज के बाद एसपी पूर्वी यतीमखाना की तरफ आए, तो उनके पीछे कुछ लोग गुलाब के फूलों से भरा थैला लेकर आए। उन लोगों ने पुलिसवालों को गुलाब के फूल देकर अमन और शांति का भरोसा दिलाया।
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थोड़ी ही देर में हजारों की भीड़ सड़क पर उतर आई और पथराव शुरू हो गया। कानपुर में हुई हिंसा के साजिशकर्ताओं ने बच्चों को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने बच्चों को ढाल बनाया और उनके पीछे रहकर पथराव कर आगजनी की। यही वजह रही कि पुलिस को कार्रवाई करने में थोड़ी मुश्किल हुई। जब बच्चे किसी तरह से हटे तब पुलिस ने लाठी भांजी, आंसू गैस के गोले दागे।
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यतीमखाना, परेड का बवाल हो या बाबूपुरवा में आगजनी का मामला हो। उपद्रवियों ने पूरी तरह साजिश रचने के बाद हिंसा को अंजाम दिया। दोनों जगहों पर हजारों उपद्रवियों के आगे बच्चे रहे। उनकी साजिश में फंसकर बच्चों ने पुलिस पर पथराव किया। एसएसपी अनंत देव ने बताया कि भीड़ के आगे बच्चों को बचाया गया। उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। उनके हाटने के बाद हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की गई।