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बेबसी: कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा, हैलट बालरोग विभाग में एक वेंटिलेटर तक नहीं
Mon, 10 May 2021 07:23 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 10 May 2021 07:23 AM IST
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कोरोना मचा रहा तबाही
- फोटो : amar ujala
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कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक बताई जा रही है। ऐसे में हैलट के बालरोग अस्पताल के पास अपना एक वेंटिलेटर तक नहीं है। 28 बेड के वेंटिलेटर युक्त आईसीयू के लिए शासन को भेजा गया प्रस्ताव तीन साल से ठंडे बस्ते में है। अब तीसरी लहर का खतरा सिर पर मंडराने लगा है तो न्यूरो साइंसेज लेवल थ्री कोविड अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बाल रोगियों को भर्ती करने की योजना बनाई जा रही है। हैलट के बालरोग अस्पताल में नगर और देहात ही नहीं, आसपास के आठ जिलों के रोगी आते हैं।
कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
यह रेफरल सेंटर भी है। बाल रोगियों का मामला अधिक संवेदनशील रहता है, लेकिन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन यहां की व्यवस्था के लिए सतर्क ही नहीं है। कोरोना की पहली लहर में बच्चों पर अधिक खतरा नहीं था, लेकिन दूसरी लहर में कोरोना के बाल रोगियों की संख्या बढ़ गई। हालांकि, ज्यादातर ठीक हो गए। तीसरी लहर में भी अस्पताल में महामारी से निपटने के संसाधन नहीं हैं।
कोरोना का कहर
- फोटो : amar ujala
मेडिसिन विभाग के भरोसे कब तक
मेडिसिन विभाग के आईसीयू में ही बाल रोगियों को जगह दे दी जाती है। कभी उनके लिए दो तो कभी पांच वेंटिलेटर दिए जाते हैं। अगर बच्चों में संक्रमण बढ़ा तो स्थिति संभालनी मुश्किल हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अभी योजना बनाई है कि न्यूरो साइंसेज के एक फ्लोर पर ही बाल रोगियों की भी व्यवस्था की जाएगी। बड़े और बच्चे दोनों में संक्रमण बढ़ा तो क्या होगा? इसके लिए अभी प्रबंधन नहीं सोच पाया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि इलाज की पूरी व्यवस्था कर ली जाएगी।
मेडिसिन विभाग के आईसीयू में ही बाल रोगियों को जगह दे दी जाती है। कभी उनके लिए दो तो कभी पांच वेंटिलेटर दिए जाते हैं। अगर बच्चों में संक्रमण बढ़ा तो स्थिति संभालनी मुश्किल हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अभी योजना बनाई है कि न्यूरो साइंसेज के एक फ्लोर पर ही बाल रोगियों की भी व्यवस्था की जाएगी। बड़े और बच्चे दोनों में संक्रमण बढ़ा तो क्या होगा? इसके लिए अभी प्रबंधन नहीं सोच पाया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि इलाज की पूरी व्यवस्था कर ली जाएगी।
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कोरोना से मचा कोहराम
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28 बेड की है न्यूरो साइंसेज की दूसरी मंजिल
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव का कहना है कि न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल की दूसरी मंजिल पर 28 बेड हैं। हर बेड पर वेंटिलेटर है। अगर ऐसी स्थिति आती है तो यह पूरा फ्लोर खाली करा लिया जाएगा। इसमें बाल रोगियों को भर्ती किया जाएगा। साथ ही और भी इंतजाम किए जा रहे हैं।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव का कहना है कि न्यूरो साइंसेज कोविड अस्पताल की दूसरी मंजिल पर 28 बेड हैं। हर बेड पर वेंटिलेटर है। अगर ऐसी स्थिति आती है तो यह पूरा फ्लोर खाली करा लिया जाएगा। इसमें बाल रोगियों को भर्ती किया जाएगा। साथ ही और भी इंतजाम किए जा रहे हैं।
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तीन साल से प्रस्ताव पर कोई काम नहीं
बालरोग अस्पताल के अलग वेंटिलेटर युक्त आईसीयू के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन ने शासन को तीन साल पहले प्रस्ताव भेजा था। शासन ने हामी भी भर ली थी, लेकिन इसके बाद मामला अटक गया। बच्चों के इंटेंसिव केयर इलाज की व्यवस्था नहीं हो पाई। प्रस्ताव किस स्थिति में है, यह भी पता नहीं। यह प्रस्ताव 28 बेड के वेंटिलेटर युक्त आईसीयू के लिए था।
बालरोग अस्पताल के अलग वेंटिलेटर युक्त आईसीयू के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन ने शासन को तीन साल पहले प्रस्ताव भेजा था। शासन ने हामी भी भर ली थी, लेकिन इसके बाद मामला अटक गया। बच्चों के इंटेंसिव केयर इलाज की व्यवस्था नहीं हो पाई। प्रस्ताव किस स्थिति में है, यह भी पता नहीं। यह प्रस्ताव 28 बेड के वेंटिलेटर युक्त आईसीयू के लिए था।