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नवरात्र: आज और कल इस विधि से जरूर करें कन्या पूजन, वरना अधूरे रह जाएंगे नौ दिनों के व्रत-अनुष्ठान

Sat, 13 Apr 2019 10:49 AM IST
शिखा पांडेय आकांक्षा मिश्रा, कानपुर
आकांक्षा मिश्रा, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 13 Apr 2019 10:49 AM IST
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Chaitra Navratri 2019 special story on kanya pujan
फाइल फोटो
नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। यदि कोई सच्चे मन से देवी मां की आराधना करते हुए कन्याओं का पूजन करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं बहुत जल्द पूरी होती हैं। जिस तरह बिना कलश पूजन के नवरात्र के सभी व्रत और अनुष्ठान अधूरे हैं उसी प्रकार कन्या पूजन करना आवश्यक है। कम ही लोगों को कन्या पूजन की सही विधि, कन्या पूजन के लाभ व इससे जुड़ी विशेष बातें पता होती हैं।


ज्योतिषाचार्य डॉ. नरेंद्र दीक्षित बता रहे हैं कि कन्या पूजन के दौरान किन सावधानियों को बरतना चाहिए जिससे धन-धान्य की प्राप्ति हो... 
 
Chaitra Navratri 2019 special story on kanya pujan
फाइल फोटो
नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजन के बाद ही भक्त व्रत पूरा करते हैं। भक्त अपने सामर्थ्य के मुताबिक भोग लगाकर दक्षिणा देते हैं। इससे माता प्रसन्न होती हैं। नवरात्र की सप्तमी से कन्या पूजन शुरू हो जाता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन इन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर पूजा जाता है। कन्याओं के पैरों को धोया जाता है और उन्हें आदर-सत्कार के साथ भोजन कराया जाता है। ऐसा करने वाले भक्तों को माता सुख-समृद्धि का वरदान देती है।
Chaitra Navratri 2019 special story on kanya pujan
फाइल फोटो
इस दिन जरूर करें कन्या पूजन
सप्तमी से ही कन्या पूजन का महत्व है लेकिन, जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत करते हैं वे तिथियों के मुताबिक नवमी और दशमी को कन्या पूजन करने के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर व्रत खत्म करते हैं। शास्त्रों में भी बताया गया है कि कन्या पूजन के लिए दुर्गाष्टमी के दिन को सबसे अहम और शुभ माना गया है।
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Chaitra Navratri 2019 special story on kanya pujan
फाइल फोटो
ऐसे करें कन्या पूजन

- कन्या पूजन के लिए कन्याओं को एक दिन पहले सम्मान के साथ आमंत्रित करें। खासकर कन्या पूजन के दिवस ही कन्याओं को यहां-वहां से एकत्र करके लाना उचित नहीं होता है।
- गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करना चाहिए। नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाना चाहिए।
- कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ स्थान पर बैठाकर सभी के पैरों को स्वच्छ पानी या दूध से भरे थाल में पैर रखवाकर अपने हाथों से उनके पैर धोना चाहिए। पैर छूकर आशीष लेना चाहिए और कन्याओं के पैर धुलाने वाले जल या दूध को अपने मस्तिष्क पर लगाना चाहिए।
- कन्याओं को स्वच्छ और कोमल आसन पर बैठाकर पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए, उसके बाद कन्याओं को माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए। 
- इसके बाद मां भगवती का ध्यान करने के बाद इन देवी स्वरूप कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं। कन्याओं को अपने हाथों से थाल सजाकर भोजन कराएं और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और दोबारा से पैर छूकर आशीष लें।
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Chaitra Navratri 2019 special story on kanya pujan
फाइल फोटो
2-10 वर्ष तक की कन्याओं का करें पूजन

- अपने घर में बुलाई जाने वाली कन्याओं की आयु 2 से 10 वर्ष के भीतर होनी चाहिए।
- कम से कम 9 कन्याओं को पूजन के लिए बुलाना चाहिए। जिसमें से एक बालक भी होना अनिवार्य है। जिसे हनुमानजी का रूप माना गया है। जिस प्रकार मां की पूजा भैरव के बिना पूर्ण नहीं होती, उसी प्रकार कन्या पूजन भी एक बालक के बगैर पूरा नहीं माना जाता। यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं, उनका स्वागत करना चाहिए।
 
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