{"_id":"5beda775bdec22697e539e8b","slug":"brother-and-sister-who-take-ailing-father-on-a-rickshaw","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ये कैसी व्यवस्थाः बारी-बारी से भाई-बहन ने खुद रिक्शा चलाकर पिता को पहुंचाया डॉक्टर के पास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये कैसी व्यवस्थाः बारी-बारी से भाई-बहन ने खुद रिक्शा चलाकर पिता को पहुंचाया डॉक्टर के पास
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 15 Nov 2018 10:41 PM IST
सार
- दवा के रिएक्शन से हालत बिगड़ी, 108 नंबर को कॉल करने के बाद भी नहीं उठा फोन
विज्ञापन
बीमार पिता को रिक्शे पर लिटाकर ले जाती किशोरी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तमाम प्रयासों के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेपटरी साबित हो रही हैं। फोड़े के कारण कई दिनों से बीमार चल रहे पल्लेदार ने गुरुवार सुबह दवा खाई तो उसका रिएक्शन हो गया। हालत इतनी बिगड़ी कि घर पर मौजूद उसकी पत्नी और बच्चों में चीख पुकार मच गई। 108 नंबर मिलाया गया, लेकिन फोन नहीं उठा। कई बार के प्रयास के बाद भी जब बात नहीं हो सकी तो मजबूर बच्चे अपने पिता को रिक्शे पर लिटाकर अस्पताल को चल दिए। जिला अस्पताल दूर था इसलिए सरायमीरा के एक डॉक्टर से इलाज कराया।
कन्नौज शहर के मानपुर मोहल्ला निवासी शेर सिंह (45) पल्लेदारी करता है। करीब 15 दिनों से उसकी कमर में फोड़ा है। उसने जिला अस्पताल में इलाज कराया। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसने एक प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराना शुरू किया। शेर सिंह की पत्नी रेखा ने बताया कि सुबह पति ने दवा खाई तो उनकी हालत बिगड़ गई। पति कुछ बोल नहीं पा रहे थे। यह देख घर में चीख पुकार मच गई। अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस पर कॉल की गई लेकिन फोन नहीं उठ सका।
विज्ञापन
कन्नौज शहर के मानपुर मोहल्ला निवासी शेर सिंह (45) पल्लेदारी करता है। करीब 15 दिनों से उसकी कमर में फोड़ा है। उसने जिला अस्पताल में इलाज कराया। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसने एक प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराना शुरू किया। शेर सिंह की पत्नी रेखा ने बताया कि सुबह पति ने दवा खाई तो उनकी हालत बिगड़ गई। पति कुछ बोल नहीं पा रहे थे। यह देख घर में चीख पुकार मच गई। अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस पर कॉल की गई लेकिन फोन नहीं उठ सका।
विज्ञापन
बहन थकी तो छोटे भाई ने चलाया रिक्शा
बहन के थकने के बाद छोटे भाई ने खींचा रिक्शा।
इसके बाद बेटी सपना और बेटे गोलू ने पति को हाथ रिक्शे पर लादा और जिला अस्पताल के लिए चल दिए। अस्पताल दूर होने के कारण कुछ लोगों की सलाह पर वह पति को लेकर सरायमीरा स्थित डॉक्टर के पास पहुंची। इलाज के बाद कुछ सुधार हुआ और डॉक्टर ने घर भेज दिया।
बहन थकी तो छोटे भाई ने चलाया रिक्शा
13 साल की सपना और 10 साल का गोलू जब पिता को लेकर अस्पताल के लिए निकले तो पहले सपना ने रिक्शा चलाना शुरू किया। कुछ दूर जाने पर जब सपना थक गई तो गोलू ने रिक्शे का हैंडल खुद थाम लिया। मां रेखा भी पीछे धक्का लगाकर मदद करती रही।
यह गंभीर बात है। मामले की जानकारी हुई है। हालांकि अभी पीड़ित परिवार नहीं मिला है। यदि लिखित शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराकर शासन को पत्र लिखेंगे। एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए ही है, उन्हें हरहाल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. कृष्ण स्वरूप, मुख्य चिकित्साधिकारी।
बहन थकी तो छोटे भाई ने चलाया रिक्शा
13 साल की सपना और 10 साल का गोलू जब पिता को लेकर अस्पताल के लिए निकले तो पहले सपना ने रिक्शा चलाना शुरू किया। कुछ दूर जाने पर जब सपना थक गई तो गोलू ने रिक्शे का हैंडल खुद थाम लिया। मां रेखा भी पीछे धक्का लगाकर मदद करती रही।
यह गंभीर बात है। मामले की जानकारी हुई है। हालांकि अभी पीड़ित परिवार नहीं मिला है। यदि लिखित शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराकर शासन को पत्र लिखेंगे। एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए ही है, उन्हें हरहाल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. कृष्ण स्वरूप, मुख्य चिकित्साधिकारी।