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बेनेगल की जुबानी-'Bollywood का इतिहास', शोध और कला के बीच समझाया फिल्मों का रिश्ता
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 16 Mar 2018 01:47 PM IST
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श्याम बेनेगल
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फिल्में शोध और कला के बीच का रिश्ता है। फिल्ममेकिंग कोई भी नई खोज या अविष्कार के बिना सफल हो ही नहीं सकती है। यह कहना है मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल का। आईआईटी कानपुर में गुरुवार देर शाम चार दिवसीय टेक्निकल फेस्टिवल टेककृति-18 का शुभारंभ हो गया। बतौर मुख्य अतिथि मशहूर फिल्मकार पद्मश्री श्याम बेनेगल ने टेककृति में शामिल होने आए देशभर के छात्रों से सीधे संवाद किया। हिंदी सिनेमा का गौरवशाली इतिहास बताया।
श्याम बेनेगल
- फोटो : अमर उजाला
श्याम बेनेगल ने बोले- सिनेमा को हमेशा समाज का आइना माना जाता रहा है। यही कारण है कि पहले जो फिल्में बनती थीं वह समाज को प्रेरित करती थीं। बेनेगल ने फिल्म में तकनीक के प्रयोग की शुरुआत के बारे में भी बताया और आईआईटीयंस से कहा कि वे भी कुछ ऐसी तकनीक तैयार करें जिससे सिनेमा जगत को लाभ मिले।
उन्होंने शोध और कला के बीच रिश्ता भी बताया। बोले, कोई भी खोज या अविष्कार कला का ही हिस्सा होता है। इसके पहले श्याम बेनेगल के साथ उनकी पत्नी नीरा बेनेगल, पटकथा लेखक अतुल तिवारी और आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
उन्होंने शोध और कला के बीच रिश्ता भी बताया। बोले, कोई भी खोज या अविष्कार कला का ही हिस्सा होता है। इसके पहले श्याम बेनेगल के साथ उनकी पत्नी नीरा बेनेगल, पटकथा लेखक अतुल तिवारी और आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
आईआईटी में मौजूद महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
1896 में देश में पहली बार प्रदर्शित हुई थी फिल्म
श्याम बेनेगल ने बताया कि भारतीय सिनेमा का इतिहास उन्नीसवीं शताब्दी के पहले का है। 1896 में ल्युमेरे ब्रदर्स द्वारा शूट की गई पहली फिल्म का प्रदर्शन मुंबई में हुआ था। इस फिल्म से प्रभावित होकर हरिशचंद्र सखाराम भाटवडेकर (सावे दादा) ने इंग्लैंड से एक कैमरा मंगवाया और मुंबई के हैंगिंग गार्डन में कुश्ती मैच की रिकॉर्डिंग की जिसे द रेसलर के रूप में जाना जाता है। श्याम बेनेगल ने बताया कि 1931 में पहली बार फिल्म आलम आरा को प्रदर्शित करने के लिए टॉकीज की शुरुआत हुई। इस फिल्म में 30 गाने हुए थे जिससे बॉलीवुड को म्यूजिक सिनेमा के रूप में भी जाना जाने लगा।
श्याम बेनेगल ने बताया कि भारतीय सिनेमा का इतिहास उन्नीसवीं शताब्दी के पहले का है। 1896 में ल्युमेरे ब्रदर्स द्वारा शूट की गई पहली फिल्म का प्रदर्शन मुंबई में हुआ था। इस फिल्म से प्रभावित होकर हरिशचंद्र सखाराम भाटवडेकर (सावे दादा) ने इंग्लैंड से एक कैमरा मंगवाया और मुंबई के हैंगिंग गार्डन में कुश्ती मैच की रिकॉर्डिंग की जिसे द रेसलर के रूप में जाना जाता है। श्याम बेनेगल ने बताया कि 1931 में पहली बार फिल्म आलम आरा को प्रदर्शित करने के लिए टॉकीज की शुरुआत हुई। इस फिल्म में 30 गाने हुए थे जिससे बॉलीवुड को म्यूजिक सिनेमा के रूप में भी जाना जाने लगा।
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आईआईटी कानपुर में कार्यक्रम के दौरान बॉलीवुड जगत की हस्तियां
- फोटो : अमर उजाला
देश में क्रिएटिव लेखकों की कमी नहीं
थ्री इडियट में काम कर चुके और पटकथा लेखक अतुल तिवारी भी टेककृति में शामिल होने आईआईटी पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि देश में क्रिएटिव लेखकों की कोई कमी नहीं है। दंगल, पैडमैन जैसी कई फिल्मों की कहानियां इसकी बानगी हैं। युवाओं को पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों के लिए भी थोड़ा समय देना चाहिए जिससे उनका हर तरफ से विकास हो।
थ्री इडियट में काम कर चुके और पटकथा लेखक अतुल तिवारी भी टेककृति में शामिल होने आईआईटी पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि देश में क्रिएटिव लेखकों की कोई कमी नहीं है। दंगल, पैडमैन जैसी कई फिल्मों की कहानियां इसकी बानगी हैं। युवाओं को पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों के लिए भी थोड़ा समय देना चाहिए जिससे उनका हर तरफ से विकास हो।
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आईआईटी कानपुर में कार्यक्रम के दौरान छात्र
- फोटो : अमर उजाला
अंताक्षरी में छात्रों ने खूब गाया गाना
टेककृति के तहत देर रात हॉस्टलों में अंताक्षरी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। इसमें देशभर से जुटे छात्र-छात्राओं ने शिरकत की। देर रात तक गानों और कविताओं का दौर चला। एक से बढ़कर एक गानों के जरिए छात्रों ने खूब मस्ती की।
टेककृति के तहत देर रात हॉस्टलों में अंताक्षरी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। इसमें देशभर से जुटे छात्र-छात्राओं ने शिरकत की। देर रात तक गानों और कविताओं का दौर चला। एक से बढ़कर एक गानों के जरिए छात्रों ने खूब मस्ती की।