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बोफोर्स कंपनी ने ओएफसी को दिया तोप का आर्डर, कभी इस कंपनी से भारतीय सेना के लिए खरीदी गई थी तोपें
Wed, 24 Jun 2020 08:27 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 24 Jun 2020 08:27 AM IST
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कानपुर में बनी शारंग तोप
यूरोप की सबसे पुरानी और तोप निर्माण की दिग्गज स्वीडन की कंपनी बोफोर्स को आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) में बनी तोप भा गई है। कंपनी ने निर्माणी को तोप बनाने का आर्डर दिया है। यह आर्डर छह से आठ महीने में पूरा करना है।
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लखनऊ डिफेंस एक्सपो में शारंग तोप
- फोटो : अमर उजाला
निर्माणियों के निगमीकरण के बीच इस तरह का आर्डर मिलना बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मई के अंत में आर्डर की प्रक्रिया पूरी की गई थी। आयुध निर्माणी बोर्ड की ओर से निर्माणी में तोप निर्माण के संबंध में आर्डर संबंधी पत्र भी आ गया है।
बोफोर्स तोप
- फोटो : अमर उजाला
यहां के उत्पादों के प्रति स्वीडन की कंपनी ने फीडबैक भी अच्छा दिया है। बोफोर्स कंपनी के अनुसार तोप तैयार की जाएगी। ओफएसी के बाद फील्डगन फैक्टरी में भी तोप निर्माण की प्रक्रिया की जाएगी। दरअसल पिछले साल मई में बोफोर्स कंपनी ने ओएफसी को अपनी तोपें अपग्रेड करने को कहा था। इसके बाद यहां से जो मॉडल भेजा गया, उससे कंपनी इतनी प्रभावित हुई कि उसने यह आर्डर दे डाला।
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बोफोर्स तोप
- फोटो : अमर उजाला
इस तरह की बनेगी तोप
155 गुणा 52 कैलिबर वाली तोप की बैरल की लंबाई आठ मीटर होगी। इस उत्पाद को मेक इन इंडिया मिशन के तहत पूरी स्वदेशी तकनीक से तैयार किया जाएगा।
155 गुणा 52 कैलिबर वाली तोप की बैरल की लंबाई आठ मीटर होगी। इस उत्पाद को मेक इन इंडिया मिशन के तहत पूरी स्वदेशी तकनीक से तैयार किया जाएगा।
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बोफोर्स
- फोटो : amar ujala
1986 में खरीदी गईं थी बोफोर्स तोप
केंद्र सरकार ने 1986 में बोफोर्स से कई हजार करोड़ के रक्षा खरीद सौदे के तहत 400 तोपों को खरीदा था। ये तोपें देश की सरहदों पर तैनात की गई थीं। आज भी इन तोपों का सेना इस्तेमाल कर रही है। वहीं इसी तोप का अपग्रेड वर्जन ओएफसी और फील्डगन फैक्टरी ने मिलकर तैयार किया था। जिसे धनुष तोप नाम दिया गया है।
केंद्र सरकार ने 1986 में बोफोर्स से कई हजार करोड़ के रक्षा खरीद सौदे के तहत 400 तोपों को खरीदा था। ये तोपें देश की सरहदों पर तैनात की गई थीं। आज भी इन तोपों का सेना इस्तेमाल कर रही है। वहीं इसी तोप का अपग्रेड वर्जन ओएफसी और फील्डगन फैक्टरी ने मिलकर तैयार किया था। जिसे धनुष तोप नाम दिया गया है।