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पांच लोगों को मौत के घाट उतारने वाले भाजपा विधायक ने जेल में रहकर जीता था चुनाव, मिली उम्रकैद की सजा
Fri, 19 Apr 2019 11:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 19 Apr 2019 11:06 PM IST
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उम्रकैद की सजा पाने वाले भाजपा विधायक अशोक चंदेल
सामूहिक नरसंहार में उम्रकैद की सजा पाने वाले भाजपा के विधायक अशोक सिंह चंदेल राजनीति में भी पुरोधा माने जाते हैं। उनका ताना-बाना इतना सशक्त है कि जेल में रहकर भी जीत जाते हैं। वर्ष 1999 में बसपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाया था। तब वह जेल में थे। इसके बाद भी चुनाव जीतकर सांसद बन गए।
अशोक चंदेल (फाइल फोटो)
लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान के दूसरे चरण के ठीक बाद पूर्व विधायक को सामूहिक हत्याकांड में उम्रकैद की सजा से भाजपा को झटका लगना स्वाभाविक है। अशोक चंदेल भाजपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह चंदेल के लिए कुछ न कुछ कर ही रहे थे। हालांकि, चर्चा यह भी है कि पिछले कुछ दिनों से पुष्पेंद्र और अशोक चंदेल के बीच संबंधों में खटास थी। पिछले वर्ष मौदहा में हुए हंगामे के दौरान यह मनमुटाव सार्वजनिक तौर पर सामने भी आया था।
अशोक चंदेल (फाइल फोटो)
हाईकोर्ट के फैसले के बाद न सिर्फ हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय सीट, बल्कि पड़ोसी जिलों की सीटों पर भी भाजपा को घेरने को विपक्षियों को मौका मिलेगा। चंदेल की भाजपा में पकड़ मजबूत है। इसकी बानगी यह है कि वर्ष 2017 में मोदी लहर देख वह भाजपा में शामिल हो गए।
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अशोक चंदेल (फाइल फोटो)
उन्हें भाजपा ने हमीरपुर से टिकट भी दे दिया, जबकि उस दौरान बुंदेलखंड की भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत कई भाजपा नेताओं ने अशोक चंदेल को भाजपा में शामिल करने का विरोध किया था, लेकिन यह विरोध चंदेल की चमक के आगे कमजोर पड़ गया। चित्रकूटधाम मंडल के राजनीतिक गलियारों में अशोक सिंह चंदेल काफी जाना-पहचाना और चर्चित नाम है।
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भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल
वह हमीरपुर से एक बार सांसद और चार बार विधायक बने। माननीय बनने की शुरुआत 1989 में निर्दलीय विधायक के रूप में हुई। इसके अलावा 1993 और 2008 में भी विधायक रहे। 1999 में बसपा से सांसद हुए। मौजूदा समय में भाजपा से विधायक हैं। 26 जनवरी 1997 को देर शाम हमीरपुर में राजीव शुक्ला के भाई राजेश शुक्ला, राकेश शुक्ला, भतीजा अंबुज समेत पांच लोगों की हत्या में अशोक सिंह चंदेल और उनके निजी गनर समेत पांच पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी।