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बिकरू कांड: शहीद की पत्नियों ने पीएम से मांगा बराबरी का हक, प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बयां किया दर्द

Thu, 05 Aug 2021 06:44 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 05 Aug 2021 06:44 PM IST
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Bikru case: Martyr's wife asked for equal rights from PM
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में शहीद पुलिसकर्मियों में से तीन शहीद की पत्नियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र के जरिये मांग की गई है कि सभी शहीद के परिजनों को बराबरी का हक मिले। इसलिए सभी को ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) के पद नौकरी दी जाए। बिकरू कांड में डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। पिछले महीने डीसीपी की बेटी वैष्णवी मिश्रा को पुलिस विभाग में ओएसडी के पद पर नौकरी दी गई है। शहीद बबलू कुमार के भाई उमेश को सिपाही के पद नौकरी मिली। जबकि शहीद सिपाही राहुल, सिपाही सुलतान और दरोगा अनूप सिंह की पत्नियों ने दरोगा के पद पर आवेदन किया था। जिसकी प्रक्रिया चल ही रही है। इस बीच जब डीएसपी की बेटी को ओएसडी के पद पर नौकरी दी गई तो इन शहीद की पत्नियों ने सवाल खड़े किए हैं।
Bikru case: Martyr's wife asked for equal rights from PM
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली निवासी शहीद सिपाही राहुल की पत्नी दिव्या भारती का कहना है कि सभी शहीद के परिजनों को समान नौकरी देनी चाहिए। शैक्षिक योग्यता भी ओएसडी की है इसके बावजूद दरोगा के पद पर आवेदन कराया गया।
Bikru case: Martyr's wife asked for equal rights from PM
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : amar ujala
ये भेदभाव है। इसलिए उन्होंने और शहीद दरोगा अनूप सिंह की प्रतापगढ़ निवासी पत्नी नीतू सिंह व सिपाही सुलतान की झांसी निवासी पत्नी उर्मिला ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।
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Bikru case: Martyr's wife asked for equal rights from PM
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
किसी तरह की विशेष छूट नहीं दी जा रही
शहीद की पत्नियों का कहना है कि दरोगा भर्ती के लिए जो मानक तय किए गए वो सभी पूरे कराए जा रहे हैं। फिजिकल, लिखित परीक्षा व फिर मेडिकल होगा। ऐसे में ये समझ से परे है कि आखिर हम सभी को क्या छूट दी जा रही है।
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Bikru case: Martyr's wife asked for equal rights from PM
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
ये पूरी तरह से सामान्य दरोगा भर्ती की प्रक्रिया है। इन तीनों शहीद की पत्नियों ने परास्नातक  की परीक्षा पास की हुई है। इसलिए उनका कहना है कि डीसीपी की बेटी की तरह उनको भी उसी पद पर नौकरी दी जाए।
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