कानपुर देहात के चौबेपुर क्षेत्र में तीन साल पहले हुए बिकरू कांड का मुख्य मामला कानूनी दांवपेंच के चलते तारीख-दर-तारीख लंबित चल रहा है। अभियोजन की लगातार पैरवी व अदालत के सख्त रुख अपनाने पर आरोपियों पर आरोप तय हो सके। अब गवाही शुरू हुई है। बचाव पक्ष पिछली कई तिथियों से जिरह कर रहा है। अभी कई अधिवक्ता जिरह के लिए शेष है। इससे बिकरू कांड पर फैसला आना कोसों दूर है।
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बिकरू कांड के तीन साल: आज के ही दिन गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था गांव, आठ पुलिसकर्मियों का हुआ था कत्ल
Mon, 03 Jul 2023 02:05 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 03 Jul 2023 02:05 PM IST
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बिकरू कांड (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
जब अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो बचाव पक्ष ने पुलिस केस डायरी की नकल का मुद्दा उठाया। इस पर सभी आरोपियों को पुलिस केस डायरी उपलब्ध कराई गई। इस कार्रवाई में ही कई महीने बीत गए। जब आरोपियों पर आरोप तय होने की बारी आई तो बचाव पक्ष ने अपूर्ण केस डायरी को मुद्दा बनाया। अदालत में मामले की सुनवाई के लिए सभी आरोपियों व उनके अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त स्थान न होने की बात उठाते हुए सुनवाई खुले स्थान में करने की मांग कर प्रार्थना पत्र दाखिल किया। अदालत के प्रार्थना पत्र निरस्त करने के बाद बचाव पक्ष ने आरोपियों की ओर से एक-एक कर आरोप मुक्त करने के प्रार्थना पत्र अदालत में दाखिल किए गए। सुनवाई होने के बाद अदालत ने इन्हें निरस्त कर दिया।
बिकरू कांड (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इससे आरोपियों पर आरोप तय न होने से विचारण लंबित होता चला गया। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने अपनी पैरवी तेज की, साथ ही अदालत ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने बचाव पक्ष को आरोपियों को आरोप मुक्त प्रार्थना पत्र पेश करने का अंतिम अवसर देते हुए हिदायत दी। इस पर फरवरी 2023 में आरोपियों पर आरोप तय कर मामले में विचारण शुरू कर दिया गया। अभियोजन की ओर से मार्च 2023 में मामले में पहले गवाह दरोगा कुंवरपाल को पेश कर कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने गवाह से जिरह शुरू की जो पिछली कई तिथियों से जारी है वहीं अभी मामले में अन्य आरोपियों की ओर कई अधिवक्ताओं को गवाह से जिरह करनी है। अभियोजन की ओर से अभी कई गवाहों को पेश करना है। इन परिस्थितियों में मामले में फैसला अभी कोसों दूर नजर आ रहा है।
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बिकरू कांड (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
रिचा दुबे मामले में हुई पहली गवाही
बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी के खिलाफ चौबेपुर पुलिस ने दूसरे की आईडी से लिए गए सिम कार्ड का उपयोग करने का मामला दर्ज किया था साथ ही विवेचना कर आरोप पत्र एंटी डकैती कोर्ट में पेश किए थे। इस मामले में रिचा दुबे को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। मामले में बचाव पक्ष ने क्षेत्राधिकार को चुनौती देते हुए प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश कर निचली अदालत में मामला चलने योग्य बताया। अभियोजन की लगातार पैरवी पर इसी साल फरवरी में अदालत ने रिचा दुबे पर आरोप तय कर आगे की सुनवाई के लिए पत्रावली सीजेएम कोर्ट में भेज दी। जहां अभियोजन की ओर से पहले गवाह वादी तत्कालीन इंस्पेक्टर केएन राय के बयान दर्ज कराए गए। वहीं अभी बचाव पक्ष की जिरह शेष है। इस मामले में भी अभी विचारण की शुरूआत है मामला फैसले तक कब पहुंचेगा यह समय बताएगा।
बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी के खिलाफ चौबेपुर पुलिस ने दूसरे की आईडी से लिए गए सिम कार्ड का उपयोग करने का मामला दर्ज किया था साथ ही विवेचना कर आरोप पत्र एंटी डकैती कोर्ट में पेश किए थे। इस मामले में रिचा दुबे को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। मामले में बचाव पक्ष ने क्षेत्राधिकार को चुनौती देते हुए प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश कर निचली अदालत में मामला चलने योग्य बताया। अभियोजन की लगातार पैरवी पर इसी साल फरवरी में अदालत ने रिचा दुबे पर आरोप तय कर आगे की सुनवाई के लिए पत्रावली सीजेएम कोर्ट में भेज दी। जहां अभियोजन की ओर से पहले गवाह वादी तत्कालीन इंस्पेक्टर केएन राय के बयान दर्ज कराए गए। वहीं अभी बचाव पक्ष की जिरह शेष है। इस मामले में भी अभी विचारण की शुरूआत है मामला फैसले तक कब पहुंचेगा यह समय बताएगा।
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कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे
- फोटो : अमर उजासा
गैंगस्टर मामले में होनी है बहस
बिकरू कांड के 30 आरोपियों पर चौबेपुर पुलिस ने गैंगस्टर की कार्यवाही की थी। मामले की विवेचना कर आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए थे। इसकी सुनवाई एडीजे कोर्ट में चल रही है। मामले में भी बचाव पक्ष ने किसी न किसी प्रार्थना पत्र के जरिये आरोपियों पर काफी समय तक आरोप तय नहीं होने दिए। इसपर अभियोजन की पैरवी व अदालत के सख्त रुख अख्तियार करने पर आरोपियों पर मई 2022 में आरोप तय हो सके। इसके बाद अभियोजन ने तीन विवेचकों सहित पांच गवाहों को अदालत में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए। वहीं, अदालत की सख्ती के चलते बचाव पक्ष ने गवाहों से जिरह पूरी की। इसके बाद आरोपियों के बयान दर्ज होने के बाद अब मामले में बहस होनी है। मामले में कुछ आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष ने गवाहों से फिर जिरह का अवसर देने के लिए प्रार्थना पत्र अदालत में दाखिल किया। इसे अदालत ने खारिज कर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया था। वहीं, पत्रावली बहस के लिए लगा दी थी। इसी दौरान अदालत के पीठासीन अधिकारी का अन्य जनपद स्थानांतरण हो गया। इससे मामले की सुनवाई रुक गई। वर्तमान में अदालत रिक्त होने के कारण यह मामला अभी लंबित है।
बिकरू कांड के 30 आरोपियों पर चौबेपुर पुलिस ने गैंगस्टर की कार्यवाही की थी। मामले की विवेचना कर आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए थे। इसकी सुनवाई एडीजे कोर्ट में चल रही है। मामले में भी बचाव पक्ष ने किसी न किसी प्रार्थना पत्र के जरिये आरोपियों पर काफी समय तक आरोप तय नहीं होने दिए। इसपर अभियोजन की पैरवी व अदालत के सख्त रुख अख्तियार करने पर आरोपियों पर मई 2022 में आरोप तय हो सके। इसके बाद अभियोजन ने तीन विवेचकों सहित पांच गवाहों को अदालत में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए। वहीं, अदालत की सख्ती के चलते बचाव पक्ष ने गवाहों से जिरह पूरी की। इसके बाद आरोपियों के बयान दर्ज होने के बाद अब मामले में बहस होनी है। मामले में कुछ आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष ने गवाहों से फिर जिरह का अवसर देने के लिए प्रार्थना पत्र अदालत में दाखिल किया। इसे अदालत ने खारिज कर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया था। वहीं, पत्रावली बहस के लिए लगा दी थी। इसी दौरान अदालत के पीठासीन अधिकारी का अन्य जनपद स्थानांतरण हो गया। इससे मामले की सुनवाई रुक गई। वर्तमान में अदालत रिक्त होने के कारण यह मामला अभी लंबित है।