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होलाष्टक आज से, जानिए क्यों इस अवधि में नहीं किए जाते शुभ काम

Mon, 06 Mar 2017 12:37 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 06 Mar 2017 12:37 AM IST
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before holi festival eight days auspicious works are not done
डेमो पिक
5 मार्च से मतलब आज से होलाष्टक लग जाएगा। होली के आठ दिन पूर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक लगता है जो पूर्णिमा तक जारी रहता है। इस काल खंड में सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित होते हैं।



 

क्या है होलाष्टक..?

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होलाष्टक का संधि-विच्छेद होता है होली और अष्टक। इसका तात्पर्य होली के आठ दिन से है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, इसकी शुरुआत होलिका दहन के सात दिन पहले और होली के त्यौहार के दिन के आठ दिन पहले होती है। पारंपरिक रूप से इसका समापन धुलेंडी के दिन हो जाता है।
 

कैसे मनाया जाता है होलाष्टक

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प्रचलित रिवाज के अनुसार होलाष्टक के पहले दिन होलिका दहन के लिए 2 डंडे स्थापित किये जाते हैं, जिसमें से एक को होलिका और दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है। हिन्दू धर्म की शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार जिस क्षेत्र में होलिका दहन के लिए ये डंडे स्थापित किये जाते हैं, उस क्षेत्र में होलिका दहन तक कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित है। क्योंकि, सनातन धर्म होलिका दहन को दाहकर्म और मृत्यु का सूचक माना गया है।
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होलाष्टक में भूल कर भी न करना ये कार्य

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हिंदू रीति रिवाजों के मुताबिक होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नही किया जाता है। होलाष्टक पांच मार्च से 12 मार्च तक रहेगा। इस दौरान हर तरह के शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि वर्जित माना गया है। फाल्गुन मास को अग्नि प्रधान माना जाता है, इसलिए होलाष्टक के दौरान इन कार्यों को करने से उसमें अग्नि के ताप का कष्ट मिलता है।


 
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होलाष्टक में इन कार्यों से नहीं होगा कुछ नुकसान

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ज्योतिषाचार्य आचार्य दीपक शर्मा की माने तो होली के पूर्व होलाष्टक का अपना अलग महत्व है। होलाष्टक को नवनेष्ट यज्ञ की शुरुआत का कारक भी माना जाता है। यानि इस दिन से सभी प्रकार के नए फलों, अन्न, चना, गन्ना आदि का प्रयोग शुरू कर दिया जाता है। इस वर्ष जिन लड़कियों की शादी हुई हो उन्हें भी अपने ससुराल में पहली होली नहीं देखनी चाहिए।
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