बसंत पंचमी पर आज चंद्रमा मीन राशि पर संचरण करेंगे। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र परिध योग के कारण सुंदर संयोग बन रहा है। साथ ही शनि देव व प्रभु शिव के पूजन से भक्तों पर विशेष कृपा बरसेगी। पं. नरेंद्र शास्त्री बता रहे हैं बसंत पंचमी की पूजन विधि के बारे में...
मां सरस्वती का इसी दिन हुआ था प्रकाट्य
बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती के प्रकाट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा व साधनाएं की जाती हैं। मां सरस्वती के प्रकाट्य दिवस के कारण इस दिन का विशेष महत्व है।
ऐसे हुई श्रृष्टि की रचना
एक कथा प्रचलित है कि भगवान विष्णु की आज्ञा से श्रृष्टि की रचना करके प्रजापति ब्रह्मा जब संसार को देखते हैं तो चारो ओर सूनसान, निर्जन, उदासी दिखायी दी। सारा वातावरण मूक सा हो गया था। तब प्रजापति ने कमंडल से जल लेकर वृक्षों में छिड़का तो एक शक्ति का जागरण हुआ, जो वीणा बजा रही थी। जिनके दूसरे हाथ में पुस्तक थी। उसी वीणा की आवाज से स्वर की उत्पत्ति हुयी।
मां सरस्वती देती ज्ञान का अक्षय भंडार
मां सरस्वती जीवन को गति प्रदान करती हैं। इस दिन पूजन-अर्चन से मां विद्धादात्री वागीश्वरी प्रसन्न होकर साधक को ज्ञान का अक्षय भंडार देती हैं।
ऐसे करें पूजन
सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर माता सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप नैवेद्ध आदि से पूजन करें। साथ ही खीर का भोग लगाकर चांदी के चम्मच से बच्चों को खिलाना चाहिए। जिससे बच्चों की स्मृति में वृद्धि होगी।