लोक गायिका मालिनी अवस्थी के गीत ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जाए ..., होली खेले रघुवीरा...’ का जादू कानपुर के दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। मौका था मालिनी अवस्थी की संस्था सोनचिरैया द्वारा रागेंद्र स्वरूप सभागार में रविवार को आयोजित कार्यक्रम ‘आजादी के लोकरंग’ का।
... तस्वीरों में देखें, मालिनी अवस्थी के साथ लोककला के विविध रंग
विलुप्त हो रही लोक कलाओं के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से मंत्रमुग्ध कर दिया। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने सभी कलाकारों की हौसलाफजाई के लिए एक-एक हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की। कहा कि एक साथ लोक विधाओं के इतने रंग कम ही देखने को मिलते हैं।
... तस्वीरों में देखें, मालिनी अवस्थी के साथ लोककला के विविध रंग
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री गिरिराज किशोर, जिलाधिकारी और पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। पहली प्रस्तुति देशी टंकार की हुई इसमें वाद्य यंत्र नक्कार, ढोलक, नाल, दुक्कड़ बजाकर कलाकारों ने दर्शकों को बांध दिया।
... तस्वीरों में देखें, मालिनी अवस्थी के साथ लोककला के विविध रंग
रायबरेली से आई कलाकार शीलू राजपूत ने बैसवारा शैली में आल्हा में गदर से लेकर आजादी की बाद तक की गाथा सुनाई। वह आल्हा सम्राट उन्नाव निवासी लल्लू वाजपेई की शिष्या रही हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक नृत्य परंपरा धोबिया की प्रस्तुति गाजीपुर से आई जीवनराम की टीम ने दी।
... तस्वीरों में देखें, मालिनी अवस्थी के साथ लोककला के विविध रंग
5 of 9
कार्यक्रम में प्रतिभा दिखाते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
‘खेत पर किसान सीमा पर सिपहिया, धीरे - धीरे खेवाए अपनी देश की नईया से...’ देश की एकता अखंडता को सहेजकर रखने का संदेश दिया। रमेश पाल की टीम ने पाई डंडा औैर दिवारी नृत्य से जोश, उत्साह, शौर्य का प्रदर्शन किया।