कानपुर में जेल से जमानत पर छूटे एक युवक का अधजला शव सचेंडी क्षेत्र की झाड़ियों में पड़ा हुआ मिला था। अमित के परिजनों को चकेरी थाने से टरका दिया गया था। जिससे न केस दर्ज करना पड़े और न तहकीकात करने की जद्दोजहद करनी हो। जिस पुलिसकर्मी ने संवेदनहीनता दिखाई थी अब वह बेनकाब हो गया है।
दरोगा अरुण यादव का यह लापरवाही भरा रवैया था। हैरानी की बात ये है कि इतनी बड़ी वारदात में लापरवाही बरतने वाला दरोगा पर उच्चाधिकारियों की मेहरबानी बरकरार है। उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अमित से उसके परिजनों की आखिरी बार बात शनिवार शाम पांच बजे हुई थी। तब उसने आधे घंटे में घर लौटने की बात कही थी।
2 of 5
Amit murder case
- फोटो : अमर उजाला
करीब एक घंटे बाद से रात 11 बजे तक वह कॉल करते रहे थे लेकिन रिसीव नहीं हुआ था। फिर मोबाइल बंद हो गया था। तब वह सबसे पहले चकेरी थाने पहुंचे थे। यहां पर नाइट अफसर दरोगा अरुण यादव मिले थे।
3 of 5
युवक को जिंदा जलाने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
अरुण ने जैसे ही तहरीर देखी और उसमें लिखा था कि यशोदा नगर जाने की बात अमित ने कही थी, वैसे ही परिजनों को नौबस्ता थाने जाने को कह दिया था। यही नहीं लिखी हुई तहरीर में अलग से यशोदा नगर भी लिखवाया था। तब परिजन नौबस्ता थाने पहुंचे थे।
4 of 5
युवक को जिंदा जलाने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
नियमानुसार स्थानीय थाने की पुलिस को इसमें कार्रवाई करनी चाहिए थे जिससे कार्रवाई जल्द शुरू हो जाती। घटना के बाद यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि परिजनों को किसने टरकाया। अब पता चल गया है कि दरोगा कौन था। उसके बाद भी उसकी जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
5 of 5
Amit murder case
- फोटो : अमर उजाला
मामले की जांच कराई जाएगी। जिस किसी ने भी लापरवाही बरती होगी, उस पर कार्रवाई होगी। सभी को निर्देश हैं कि ऐसी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई कर तफ्तीश करें। लापरवाही व संवेदनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - बीपी जोगदंड, पुलिस कमिश्नर