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झांसी फील्ड फायरिंग रेंज में हादसा: बच्चों से किया ये वादा रह गया अधूरा...अब बच्चे कैसे देख पाएंगे पापा का शव
Sat, 08 Oct 2022 11:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 08 Oct 2022 11:41 AM IST
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Jhansi field firing accident
- फोटो : अमर उजाला
झांसी फील्ड फायरिंग रेंज में हुए हादसे में जान गंवाने वाले नायब सूबेदार ने दो दिन पहले ही बच्चों को दिवाली पर घर आने की जानकारी दी थी। इसके साथ ही वादा किया था कि वे उनके लिए पटाखे व कपड़े लेकर आएंगे। इससे बच्चे व परिवार के अन्य सभी लोग बेहद खुश थे। लेकिन, सेना का यह जवान बच्चों से किया हुआ आखिरी वादा पूरा नहीं कर पाया और इससे पहले ही उसकी आंखें बंद हो गईं। शुक्रवार की देर रात तक पत्नी व बच्चों को हादसे की जानकारी नहीं दी गई थी। शनिवार को सैन्य सम्मान के साथ नायब सूबेदार का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में होगा। टैंक की बैरल फटने से हुए हादसे में जान गंवाने वाले सेना के नायब सूबेदार सुमेर सिंह वगेरिया (41) राजस्थान के झुंझनु जिले के बगढ़ियों की धानी गांव के रहने वाले थे। वह 1998 में सेना में शामिल हुए थे।
जवान सुकांता मंडल का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
परिवार में पत्नी सुमन के अलावा बेटी भावना (15) व बेटा कृष (8) हैं। पत्नी सुमन प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। सुमेर सिंह की दीपावली का त्योहार परिवार के साथ मनाने की तैयारी थी। दो दिन पहले इसकी जानकारी उन्होंने परिजनों से साझा की थी। इससे पूरा परिवार बेहद खुश हो उठा था।
सूबेदार सुमेर सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खासतौर पर बच्चे पिता के साथ दीपावली मनाने को लेकर उत्साहित थे। उन्होंने बच्चों से खूब सारे पटाखे और कपड़े लाने का वादा किया था। लेकिन, फील्ड फायरिंग रेंज में हुए हादसे में उनकी जान चली गई। हालांकि, इस घटना की जानकारी शुक्रवार को देर रात तक पत्नी व बच्चों को नहीं दी गई थी।
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हादसे के बाद मौके पर जवान
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन, आसपास के लोगों को इसकी खबर लगते ही गांव का माहौल भी गमगीन हो उठा। कई घरों में तो चूल्हे तक नहीं जले। जानकारी होने पर राजस्थान सरकार के प्रशासनिक अफसरों का भी गांव में आवागमन जारी हो गया था। सैन्य सम्मान के साथ मृतक का अंतिम संस्कार शनिवार को पैत्रिक गांव बगढ़ियों की धानी में किया जाएगा। इस दौरान क्षेत्र में तिरंगा यात्रा भी निकाली जाएगी।
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थाने में जवान
- फोटो : अमर उजाला
पांच भाइयों में छोटे थे सुमेर
नायब सूबेदार सुमेर सिंह वगेरिया के पिता भगवान राम वगेरिया किसान हैं। उनके पांच बेटे हैं, जिनमें सुमेर सबसे छोटे थे। वह शुरू से ही सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते थे। बेटे की इच्छा को ध्यान में रखते हुए पिता व परिवार के अन्य सदस्यों ने भी हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया था। 1998 में उन्हें सेना की वर्दी मिली थी। अपनी काबिलियत के बल पर पदोन्नति पाते हुए वे नायब सूबेदार तक के पद पर पहुंच गए थे।
नायब सूबेदार सुमेर सिंह वगेरिया के पिता भगवान राम वगेरिया किसान हैं। उनके पांच बेटे हैं, जिनमें सुमेर सबसे छोटे थे। वह शुरू से ही सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते थे। बेटे की इच्छा को ध्यान में रखते हुए पिता व परिवार के अन्य सदस्यों ने भी हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया था। 1998 में उन्हें सेना की वर्दी मिली थी। अपनी काबिलियत के बल पर पदोन्नति पाते हुए वे नायब सूबेदार तक के पद पर पहुंच गए थे।