बुलंदशहर के नेशनल हाईवे कांड में अदालत से पांच आरोपियों पर दोष सिद्ध होने के बाद पुलिसिया कार्यप्रणाली का वह डरावना चेहरा भी उजागर हो गया है, जिसमें वाहवाही लूटने के लिए बेगुनाहों को सलाखों के पीछे धकेला जाता है।
हरियाणा पुलिस की कार्रवाई और सीबीआई की ओर से दाखिल दो चार्जशीट ने यह साफ कर दिया कि बुलंदशहर पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती थी। साथ ही असली दरिंदों को पकड़ने की बजाय निर्दोषों को जेल भेजकर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की थी।
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हाईवे कांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम। फाइल फोटो।
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एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मी कर दिए गए थे सस्पेंड
वारदात के बाद जब आक्रोश भड़का तो तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरी। एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए। 28 जुलाई की रात को वारदात हुई और 29 जुलाई की रात बुलंदशहर पुलिस ने तीन आरोपी गिरफ्तार कर लिए। जिनकी शिनाख्त पुलिस ने रईस, नरेश और बबलू के रूप में बताई।
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हाईवे कांड के दौरान जांच करने पहुंचे तत्कालीन नवनियुक्त एसपी सिटी व देहात कोतवाली प्रभारी(फाइल फोटो)
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एक अगस्त को डीजीपी यूपी और प्रमुख सचिव घटनास्थल पर पहुंचे और प्रेस वार्ता की। इसमें तीन बदमाशों के नाम बताए गए। इनमें से दो नाम जेल भेजे गए बदमाशों से अलग थे। पीड़ित परिवार ने भी शिनाख्त और जेल भेजे गए बदमाशों पर सवाल उठाते हुए दोबारा बदमाशों की शिनाख्त की मांग की थी।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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उस दौरान पुलिस अधिकारियों का कहना था कि पहले जिन दो आरोपियों ने अपने नाम नरेश और बबलू बताए थे, वे तस्दीक के बाद शावेज और जबर निकले।
इसके बाद उसी दिन देर शाम जिले के कप्तान पर कार्रवाई हुई और आरोपियों के नाम जबर, शावेज और रईस हो गए। तब पुलिस अधिकारियों का कहना था कि डीजीपी की प्रेस कांफ्रेंस से पहले दोनों आरोपियों ने अपने नाम नरेश व बबलू ही बताए थे।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
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शासन के भारी दबाव के बीच बुलंदशहर पुलिस ने आनन-फानन तीन युवकों को गिरफ्तार कर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। पुलिस ने दावा किया कि यही वे दरिंदे हैं जिन्होंने हाईवे पर आतंक मचाया था। हालांकि जब पुलिस इन युवकों को अदालत ले जा रही थी, तब वे कैमरे के सामने चीख-चीखकर खुद को बेगुनाह बता रहे थे। उनकी आंखों में आंसू थे और जुबां पर सिर्फ एक बात कि 'साहब, हमें फंसाया गया है।'