हत्यारोपियों को न पुलिस का कोई खौफ था और न कानून व्यवस्था का, उनके चेहरे पर किसी तरह की कोई शिकन नहीं थी। ताबड़तोड़ गोलियां चलने से बाजार में भगदड़ मच गई और दुकानों के शटर गिरते चले गए। फड़ लगाने वाले व्यापारी भी भाग खड़े हुए। पुलिस के मुताबिक, रचित को छह गोली लगी हैं। एक उसके माथे में लगी है। बाकी गोली शरीर के अन्य हिस्सों में लगी हैं।
चेहरे पर नहीं था खौफ, बदमाशों ने दिया खौफनाक वारदात को अंजाम, दहल उठा इलाका, तस्वीरें
बिजनौर में कस्बा झालू में शुक्रवार को साप्ताहिक बाजार लगता है। घटना के वक्त बाजार पूरी तरह भरा था। गांव सिहोरा निवासी रचित बाजार से कुछ सामान खरीदने झालू आया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे छतरी वाले कुए के पास रचित के पीछे तमंचे लिए चार युवक दौड़ रहे थे। जान बचाने के लिए वह सचिन टेलीकाम की दुकान में घुसकर दुकान के कांउटर के पीछे जा छिपा। चारों युवकों ने दुकान में घुसकर तमंचों से गोली मारकर उसकी हत्या कर दी और आराम से दुकान के बाहर बैठ गए। दुकान स्वामी सचिन वहां से भाग निकला। किसी की भी दुकान की ओर जाने की हिम्मत नहीं हुई।
बाद में ये चारों हत्यारोपी अपनी बाइक से तमंचे लहराकर भागने लगे तो सामने से पुलिस आ गई और चारों हमलावरों को दबोच लिया। पुलिस ने इनके पास से तीन तमंचे बरामद किए हैं। सिहोरा निवासी धर्मेंद्र का पुत्र रचित दो बेटों में छोटा था और अविवाहित था। घटना की सूचना पर एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह, सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता ने निरीक्षण किया।
साथियों को बुलाकर दिया घटना को अंजाम
पकड़े गए हत्यारोपी में कस्बा झालू के मोहल्ला पीरजादगान निवासी शारिक, शादाब, शहजाद व शहबर हैं। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए हत्यारोपी शारिक ने पुलिस को बताया कि रचित उसका पीछा करता हुआ झालू तक आ गया था। उसने मोबाइल से कॉल करके अपने बाकी साथियों को बुला लिया। तब रचित की घेराबंदी करके उसकी हत्या की है। रचित से उनकी पढ़ाई के दौरान से रंजिश चली रही थी। वे रचित की हत्या नहीं करते तो रचित उनकी हत्या कर देता।
हत्या करने के बाद सिगरेट पीते रहे आरोपी
हत्यारोपियों को पुलिस का कतई डर नहीं था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हत्या करने के बाद भी उन्होंने दुकान के बाहर भी तमंचे से कई फायर करके सनसनी फैलाई। इस दौरान आरोपी दुकान के बाहर बैठकर सिगरेट पीते रहे और आपस में बतियाते रहे। युवकों देख किसी को नहीं लगा कि ये हत्या करने वाले हैं। उनके चेहरे पर जरा भी डर नहीं था। हाथों में लेकर तमंचे लहराते रहे। करीब 20 मिनट तक वे वहीं बैठे रहे। पुलिस को जब सूचना मिली तो ये तमंचे लहराते हुए बाइक से भागने लगे। रास्ते में उन्हें पुलिस मिल गई। तब ये पकड़े गए।
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