बिजनौर जिले के पुराने महलों को राजस्थान की तर्ज पर हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए राजस्थान में पुराने महलों को हेरिटेज होटल के रूप में संचालित कर रही कंपनियों से संपर्क साधने की तैयारी शुरू कर दी है। ताकि वह जिले में इन महलों को संभालकर विकसित कर सकें। सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल इस पर काम भी शुरू हो सकता है। यदि ऐसा होता है कि पर्यटन के मानचित्र पर भी जिले का कद बढ़ जाएगा। फिलहाल जिले के राजा का ताजपुर, स्याऊ और साहनपुर के महलों को चिन्हित किया गया है। इनका प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका था।
यूं तो जिले में ऐतिहासिक, पौराणिक और प्राकृतिक संपदा की कमी नहीं है। हर कौना अपने आप में इतिहास को समेटे हुए है और पर्यटन की अपार संभावनाएं भी यहां छिपी हुई हैं। जरूरत है तो पर्यटकों के रुकने के लिए बेहतर होटल की। इसके लिए एक साल पहले जिले के स्याऊ, राजा का ताजपुर और साहनपुर के पुराने महलों को हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने की कवायद हुई थी।
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बिजनौर के पुराने महल
- फोटो : अमर उजाला
प्रस्ताव शासन को भी भेजा गया। अब इस मामले में प्रशासन एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इन होटल को हेरिटेज बनाने में बड़ा बजट भी खर्च होगा। इसके लिए राजस्थान में पुराने महलों को होटल में तब्दील कर चलाने वाली कपंनियों की ओर देखा जा रहा है।
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बिजनौर के पुराने महल
- फोटो : अमर उजाला
इसके लिए कंपनियों को शीघ्र आमंत्रित भी किया जाएगा, ताकि वह जिले में आकर निवेश करें। ऐसा होता है है तो अपनी भव्यता खो रहीं पुरानी हवेलियां और महल फिर चमक उठेंगे।
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राजा का ताजपुर महल
- फोटो : अमर उजाला
राजा का ताजपुर, साहनपुर और स्याऊ के महल-हवेली के मालिक राजघरानों ने पहले ही प्रशासन को इसकी सहमति दे दी थी और अपनी इन धरोहरों को हेरिटेज होटल में बदलने की इच्छा जताई थी।
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राजा का ताजपुर महल
- फोटो : अमर उजाला
बेहतर होंगे पहुंच मार्ग, आसपास की जगह भी होगी विकसित
यदि बड़ी कंपनी आकर इन महलों को हेरिटेज होटल में बदलती है तो जहां इनके मालिकों को अच्छा खासा फायदा होगा, वहीं आसपास के लोगों तक भी इसका लाभ पहुंचेगा। यहां तक पहुंचने के लिए पहुंच मार्गों को बेहतर किया जाएगा। यहां की बिजली व्यवस्था भी सुधरेगी। साथ ही पर्यटकों के पहुंचने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।