एनआईए डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड को अंजाम देने वाले पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब की सोनभद्र जेल में सोमवार को मौत हो गई। मुनीर ने अलीगढ़ में ही अपराध का ककहरा सीखा। फिर पश्चिमी यूपी के साथ-साथ लखनऊ और दिल्ली तक सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को चकरघिन्नी बनाया। तंजील दंपती हत्याकांड के बाद वह पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ सका। पूछताछ में उसने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए। महज 25 साल की उम्र में जरायम दुनिया में नाम कमाने और अपने शौक पूरे करने के लिए अपराध करना स्वीकारा। सोमवार को वाराणसी में उसकी मौत की खबर जिले के जरायम पेशेवरों में खासी चर्चाओं में रही।
Bijnor: पश्चिमी यूपी में किलिंग मशीन का डंका बजाना चाहता था मुनीर, ऐसे खत्म हुआ जरायम का सफर
'द किलिंग मशीन ए गैंग' का वेस्ट यूपी में डंका बजाना चाहता था मुनीर
'द किलिंग मशीन ए गैंग' का सरगना मुनीर मेहताब पश्चिमी यूपी में जरायम की दुनिया का बड़ा नाम था। बिजनौर के स्योहारा कस्बे के सहसपुर से 12वीं में फेल होने के बाद 2009 में एएमयू में दाखिला लेने के उद्देश्य से यहां आए मुनीर ने पढ़ाई के बजाय जरायम की दुनिया का रास्ता अख्तियार कर लिया। यासिर-फहद की मदद से पिस्टल खरीदकर उसने सोशल मीडिया पर दाऊद की तर्ज पर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गैंग बनाकर अनगिनत हत्याएं और लूट कीं। उसे हथियारों की जरूरत थी और ये उसके शौक में भी शामिल थे। वह अब एके-47 खरीदाना चाहता था।
तंजील अहमद की हत्या के बाद पहली बार पकड़ा गया था मुनीर
मुनीर के इस गैंग में फर्रुखाबाद का आशुतोष मिश्रा, अंबेडकर नगर टांडा का सऊद, अलीगढ़ के बरला का जुबैर, मारा गया उसका भाई सद्दाम, बिहार का अतीउल्लाह, आजमगढ़ का सादाब आदि नाम हैं, जो इस गैंग के पंजीकृत सदस्य हैं। अलीगढ़ में इस गैंग ने ताबड़तोड़ वारदात कीं। इसके अलावा, दिल्ली, लखनऊ तक हाथ मारा। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद दंपती की हत्या के बाद मुनीर व उसका गैंग सुर्खियों में आया। इस हत्याकांड के बाद ही वह पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ा था।
तंजील अहमद हत्याकांड से देश भर में फैली थी सनसनी
एएमयू के छात्र गुटों की अदावत में सक्रिय मुनीर और उसके बेहद करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के नाम अलीगढ़ पुलिस के लिए नए नहीं थे। आशुतोष जेल में था, मगर मुनीर फरार था। इसी फरारी में उसने एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या की थी। इसी बीच 2 अप्रैल 2016 को तंजील दंपती की हत्या में 7 अप्रैल को उसका नाम सामने आया। एनआईए डीएसपी तंजील उस समय पाकिस्तानी घुसपैठ से जुड़े किसी घटनाक्रम की जांच कर रहे थे। इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
एसटीएफ ने मुनीर को नोएडा से किया था गिरफ्तार
तंजील अहमद की हत्या के बाद एनआईए, आईबी, दिल्ली स्पेशल सेल आदि का अंदेशा हुआ कि कहीं ये हत्या किसी देश विरोधी संगठन का काम तो नहीं। मुनीर भी कहीं ऐसे ही संगठन के लिए काम तो नहीं करता। ऐसे में मुनीर की गिरफ्तारी के लिए उस समय एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने अलीगढ़ में इस गैंग पर काम करते रहे। तेजतर्रार मुखबिर नेटवर्क वाले इंस्पेक्टर अजय कौशल, एसओजी में कार्यरत राकेश यादव, दुर्विजय सिंह व फिरोज खान को एसटीएफ लखनऊ यूनिट से संबद्ध किया। इन चारों ने दो महीने के प्रयास के बाद मुनीर को 26/27 जून को नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के एक मकान से दबोच लिया था। इसके बाद से वह जेल में ही बंद था। 21 मई को बिजनौर के एडीजे कोर्ट ने मुनीर और उसके साथी रैय्यान को फांसी की सजा सुनाई थी।