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महिला दिवस: तोड़े मिथक, चुनौतियों को मात देकर पकड़ी कामयाबी की राह; पढ़ें इन महिलाओं की कहानी

Fri, 08 Mar 2024 01:35 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 08 Mar 2024 01:35 PM IST
सार

बरेली की महिलाएं सेवा क्षेत्र से लेकर अंतरिक्ष की उड़ान तक में योगदान दे रही हैं। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग में भी शहर की महिला विज्ञानी ने अहम योगदान दिया। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने सफलता का परचम लहराया है। 

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Women's Day These women of Bareilly struggled and achieved success
वैज्ञानिक अभिलाषा अग्रवाल, छात्रा हिना खानम और उद्यमी मंजू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली की सशक्त महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहराया है। सेवा क्षेत्र से लेकर अंतरिक्ष की उड़ान तक में योगदान दे रही हैं। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग में भी शहर की महिला विज्ञानी ने अहम योगदान दिया। आदित्य एल-1 के जरिये भारत ने सूरज की ओर कदम बढ़ाया तो उसमें भी शहर की बेटी का योगदान शामिल रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की बात हो या गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी, हमारी बेटियां इसे बखूबी निभा रही हैं। आज हर बुलंदी पर महिलाओं का परचम लहरा रहा है। अपनी सफलता के दम पर वह सशक्त और विकसित भारत की बुनियाद रख दी है।

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उपलब्धि: चंद्रयान, आदित्य एल-1 में निभाई अहम भूमिका
नॉर्थ सिटी निवासी अभिलाषा अग्रवाल वर्तमान में इसरो में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बीते साल मिशन चंद्रयान-3 और मिशन आदित्य एल-1 में भेजे गए रॉकेट के कंपोनेंट डिजाइन किए थे। इन दोनों मिशन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। सफल प्रक्षेपण के बाद बरेली में रह रहे उनके अभिभावकों के पास बधाई देने वालों का तांता लगा रहा था। मथुरा केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. सुधीर कुमार अग्रवाल के मुताबिक अभिलाषा पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं। वैज्ञानिक बनने की ख्वाहिश थी जो वर्ष 2017 में इसरो में कार्य के साथ पूरी हुई। बताया कि इसरो के प्रोजेक्ट बेहद गोपनीय होते हैं, लिहाजा, बातचीत में वह कभी भी उनका जिक्र नहीं करतीं। वे बेटी की प्रतिभा, लगन से गौरवान्वित हैं। 
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उद्यमिता: बेटे के स्टार्टअप को मंजू दे रहीं हौसले की उड़ान
विदेश से पढ़ाई करके आए बेटे के स्टार्टअप को मां मंजू उड़ान दे रही हैं। मां-बेटे ने मिलकर महज तीन साल में कंपनी को वैश्विक पटल पर स्थापित कर दिया है। पीलीभीत बाइपास निवासी मंजू गुप्ता ने बताया कि उन्होंने निदेशक के तौर पर बेेटे के साथ वर्ष 2020 में कंपनी शुरू की थी। बेटा अद्वैत कंपनी का तकनीकी काम देखता है। वे मानव संसाधन का प्रबंधन करती हैं। यह स्टार्टअप रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इन्क्यूबेशन फाउंडेशन से जुड़ा है, जिसका डंका देश-दुनिया में बज रहा है। उनकी कंपनी, दूसरी प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए थ्रीडी प्रिंटिंग सलाहकार की तरह काम करती है। 

वे प्रिटिंग का सॉफ्टवेयर बनाकर बेचते हैं, जिसका नाम एएम प्रवाह रखा है। इससे धन और समय दोनों की बचत होती है। कंपनी के पांडव नाम को लेकर बताया कि बेटे ने यह नाम महाभारत से प्रेरणा लेकर रखा है। कंपनी की पांच तकनीकी क्षेत्रों में काम करने की योजना है। फिलहाल कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, कंप्यूटेशन फिजिक्स के क्षेत्र में काम कर रही है।  

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Women's Day These women of Bareilly struggled and achieved success
डॉ. नीतू गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

गोसेवा के संकल्प से उद्यमी बनीं डॉ. नीतू 
आवास विकास निवासी डॉ. नीतू गुप्ता सड़कों पर भटक रहे गोवंश को देखकर परेशान रहती थीं। कुछ ऐसा करना चाहती थीं जिससे लोगों में गोवंश के प्रति सहानुभूति हो और उनका महत्व लोगों को पता चले। इस संकल्प के साथ वह दो साल पहले आईवीआरआई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचकर वर्मी, कंपोस्ट, मशरूम और गोधन से उत्पाद तैयार करना सीखा। बीते वर्ष तुलसी मठ में वर्मी कंपोस्ट बेड लगाए। गोबर से गोकाष्ठ, कंडे, वर्मी कंपोस्ट, दीपक, देवों के नाम, घड़ी, धूपबत्ती व अन्य उत्पाद तैयार किए। आठ टन वर्मी कंपोस्ट की बिक्री हुई तो हिम्मत बढ़ी। कान्हा गोशाला में दो टन गोकाष्ठ, कंडे व अन्य उत्पाद बनाए हैं। उनके कार्य में पति आर्किटेक्ट रजनीश कमल सहयोग करते हैं।

शिक्षा: हिना फैला रहीं शिक्षा का उजियारा
छोटी बमनपुरी की हिना खानम बीकॉम फाइनल की छात्रा होने के साथ ही एक निजी स्कूल में टीचर भी हैं। स्कूल से आने के बाद वह मोहल्ले के जरूरतमंद बच्चों को सेवाभाव से पढ़ाती हैं। साथ ही लोगों को बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक भी करती हैं, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके। हिना ने बताया कि रोज उनके पास मोहल्ले के बच्चे पढ़ने आते हैं। उन्होंने कई बच्चों का स्कूल में दाखिला भी कराया है। समय-समय पर वह लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारियां भी देती रहती हैं। वह अपनी पढ़ाई, घरेलू कामकाज के साथ बच्चों को पढ़ाने के लिए भी वक्त निकाल लेती हैं। इसके लिए उन्होंने दिन भर का टाइमटेबल फिक्स किया है। उसी के अनुसार उनका रूटीन रहता है। वह खुद बैंकिंग के क्षेत्र में जाना चाहती हैं। उनके वालिद नायाब खान प्राइवेट जॉब में हैं। मां गृहिणी हैं।

खिलाड़ी: खुशबू ने शहर का नाम किया रोशन
सदर बाजार कैंट निवासी खुशबू ने सेपक टाकरा में शहर का नाम रोशन किया। साल 2023 में चीन में आयोजित एशियाई खेलों में देश की टीम का हिस्सा रहीं और शानदार प्रदर्शन कर कांस्य पदक जीता। इससे ठीक पहले थाईलैंड में आयोजित एक प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। गोवा में आयोजित हुई नेशनल गेम्स प्रतियोगिता में बरेली का प्रतिनिधित्व किया।

Women's Day These women of Bareilly struggled and achieved success
फरजाना और नैंसी प्रजापति - फोटो : अमर उजाला
आत्मनिर्भरता: लोगों को दिखा रहीं बचत की राह
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट बनकर पूरे गांव को बचत की राह दिखा रही हैं। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवसाय को नया आयाम दे रही हैं। लोगों की छोटी रकम को जमा कराकर उन्हें बचत के लिए प्रेरित कर रही हैं। जरूरत पर उनको ऋण मुहैया कराकर सहयोग कर रही हैं। ये महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। आज के विशेष अंक में हम ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी साझा कर रहे हैं।

फर्ज निभा रहीं फरजाना
भोजीपुरा के भैरपुरा खजुरिया गांव की फरजाना ने गांव के दो हजार लोगों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच आसान बनाई है। शादी के बाद भी कॅरिअर संवारने की ललक में आज से डेढ़ साल पहले उन्होंने बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट बनकर यह सफर शुरू किया। गांव की महिलाओं को बचत का महत्व समझाकर प्रेरणा दी।

गांव में ही बनाया कॅरिअर
भोजीपुरा के चौपारा गांव की नैंसी प्रजापति ने एमएससी करने के बाद बाहर जाने के बजाय गांव में ही रहकर गांव के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। वह बताती हैं दादा-दादी को उनका गांव छोड़ना जरा भी अच्छा नहीं लगता था। इसलिए वह गांव में ही बतौर बीसी सखी काम कर रही हैं। सैकड़ों लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।
 

Women's Day These women of Bareilly struggled and achieved success
शारदा और स्वाति - फोटो : अमर उजाला
डेढ़ हजार परिवारों की सलाहकार
शेरगढ़ की शारदा भी बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हैं। तीन साल से बैंकिंग व्यवसाय से जुड़कर वह यह काम कर रही हैं। शादी के बाद परिवार को मदद करने के लिए कुछ करने की चाह में काम से जुड़ीं शारदा आज डेढ़ हजार से अधिक परिवारों के लिए आर्थिक सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं। गांव के लोगों का भी सहयोग मिलता है।

स्वाति ने भी बनाई पहचान
बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट स्वाति भी ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाओं को बढ़ावा देकर अपनी पहचान बना चुकी हैं। फरीदपुर में डेढ़ साल पहले उन्होंने यह काम शुरू किया और काफी प्रयासों से सफलता हासिल की। गांव की महिलाएं दूर होने की वजह से बैंक नहीं जाती थीं। उन्होंने ऐसी महिलाओं को बचत के लिए प्रेरित किया है।
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