उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बांकेगंज में मकान के विवाद में जान देने वाले रामनरेश को आरोपी सिपाही आरती निगम के पिता व उनके साले सुंदरलाल ने ही बाबूपुर गांव में बसाया था। मात्र एक हजार वर्ग फुट के मकान में पिता और दो अविवाहित पुत्र रहते थे। पहले सब ठीक था, लेकिन तीन महीने से इसके मालिकाना हक को लेकर विवाद होने लगा। बात इस हद तक पहुंच गई कि तीनों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
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आरोपी महिला सिपाही आरती
- फोटो : अमर उजाला
गांव वालों ने बताया कि रामनरेश पूर्व में मूलत: इसी ग्राम पंचायत के तिलकपुर गांव के रहने वाले थे। आरोपी महिला सिपाही आरती के पिता स्व. सुंदरलाल ने अपनी बहन लौंगश्री की शादी रामनरेश के साथ की थी। बाद में रामनरेश की पत्नी की मौत हो गई। तब सुंदरलाल ने वर्ष 2006 में उन्हें बाबूपुर गांव में आकर बसने को कहा था, जिस पर वह तैयार हो गए। सुंदरलाल के घर के बगल में जगह खरीदकर झोंपड़ी डाल ली थी।
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रामनरेश
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नौकरी लगने के बाद ही रंग दिखाने लगी थी आरती
इसी बीच रामनरेश ने अपनी बेटी शिल्पी की शादी शाहजहांपुर जिले में कर दी थी। इसके बाद घर में रामनरेश के अलावा उसके दो पुत्र मुकेश व सुधीर ही रह गए थे। वहीं, सुंदरलाल की बेटी आरती को पुलिस विभाग में सिपाही की नौकरी मिल गई। बताते हैं कि इसके बाद से ही आरती ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। उसने अपने फूफा रामनरेश के घर पर अपना अधिकार जमाते हुए कहा कि ये जमीन उसके पिता सुंदरलाल ने दी थी। आरती, उसकी मां रामदेवी, बहन शशिबाला और भाई शिवम ने रामनरेश पर घर खाली करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इससे रामनरेश का पूरा परिवार काफी आहत और परेशान था।
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सुधीर और मुकेश
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पीएम रिपोर्ट में आया हैंगिंग, ताऊ के बेटे ने किया अंतिम संस्कार
गांव बाबूपुर निवासी सुधीर के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों को उसकी मौत का कारण बताया गया है, जो उसके ट्रेन से कटने के कारण आई। मुकेश की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग बताया गया है। दोनों के शव गांव ले जाए गए, जहां दोनों का अंतिम संस्कार उनके ताऊ तिलकपुर निवासी इतवारी के पुत्र रमेश ने किया।
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सुसाइड नोट
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पुलिस सुन लेती तो आत्महत्या की नौबत नहीं आती
पिछले तीन महीने से चल रहा यह विवाद कई बार बकिगंज पुलिस के सामने आया। रामनरेश ने हर बार पुलिस को पूरी घटना बताते हुए कहा कि उसने अपने घर की जमीन दूसरे से खरीदी थी, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी और राजस्व न्यायालय जाने की बात कहकर टरकाती रही। आरती के पुलिस में होने के कारण पुलिस उसी का पक्ष लेती रही। तीन माह में कम से कम चार बार यह मामला पुलिस के सामने पहुंचा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हर तरफ से आहत होने के बाद रामनरेश और उसके पुत्रों ने आत्महत्या का रास्ता अपनाया। बुधवार को दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश भी पुलिस चौकी पर हुई थी, पर बात नहीं बनी।