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बाप और दो बेटों ने दी जान: अपने ही घर में गुलामी की जिंदगी जीता था परिवार, मकान ही नहीं इस जमीन का भी था विवाद

Sun, 08 Dec 2024 11:44 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 08 Dec 2024 11:44 AM IST
सार

लखीमपुर खीरी के बांकेगंज के बाबूपुर गांव में महिला सिपाही पर मकान खाली कराने के लिए प्रताड़ना का आरोप लगाकर जान देने वाले बुजुर्ग के दो बेटों ने भी 36 घंटे के भीतर आत्महत्या कर ली। शुक्रवार सुबह ट्रेन से कटकर जान देने वाले छोटे बेटे ने भी सुसाइड नोट में महिला सिपाही और उसके परिजनों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

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Father and two sons suicide in Lakhimpur Kheri Ram Naresh family lived a life of slavery in their own house
Father and two sons suicide - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी के बांकेगंज के बाबूपुर गांव में मकान के मालिकाना हक के विवाद में बुजुर्ग और उनके दो बेटों ने आत्महत्या कर ली। मामले में रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बाबूपुर गांव निवासी सोहनलाल का कहना है कि राम नरेश अपने खुद के घर में गुलामी की जिंदगी जीते थे। सगे फूफा होने के बावजूद आरती उसकी मां, बहन और भाई लगातार प्रताड़ित करते थे। तिलकपुर गांव में दो एकड़ जमीन पर मेहनत वह करता था। मगर फसल राम देवी काटती थीं। मकान छिन जाने के डर से राम नरेश और उसके बच्चों ने आत्महत्या कर ली।
Father and two sons suicide in Lakhimpur Kheri Ram Naresh family lived a life of slavery in their own house
गांव में पहुंची पुलिस फोर्स - फोटो : अमर उजाला
तिलकपुर गांव की जमीन भी थी विवाद का कारण
बाबूपुर गांव के ग्रामीणों का कहना है रामनरेश, उसके पुत्रों और महिला सिपाही आरती के बीच विवाद की जड़ मकान ही नहीं, बल्कि तिलकपुर गांव में मुकेश और सुधीर के नाम एक-एक एकड़ जमीन भी थी। जमीन दोनों पुत्रों के नाम थी, मगर उस जमीन पर उगाए गए गन्ने का भुगतान रामदेवी अपने नाम की पर्चियों पर मिल भेजती थी। जबकि फसल में मेहनत, मजदूरी, सिंचाईं, गोड़ाई राम नरेश और उनके दोनों पुत्र करते थे। एक-दो साल पहले राम नरेश के दोनों पुत्रों ने चीनी मिल में सट्टा अपने नाम कराया। इसके बाद आरती और उसके परिवार ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।


 
Father and two sons suicide in Lakhimpur Kheri Ram Naresh family lived a life of slavery in their own house
सुधीर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
गांव निवासी बुजुर्ग राधा बताती हैं कि रामनरेश आरती के परिवार का सारा काम करता था। भैंस के लिए चारा, खेती-बाड़ी में मेहनत वह करता था, लेकिन आरती और उसका परिवार उसकी मेहनत की कमाई अपने पास रखता था। इसके बदले राम नरेश और उसके बच्चों को दो जून की रूखी-सूखी रोटी के सिवा कुछ नहीं मिलता था।

 
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Father and two sons suicide in Lakhimpur Kheri Ram Naresh family lived a life of slavery in their own house
इसी घर को लेकर था विवाद - फोटो : अमर उजाला
गांव निवासी हरिश्चंद्र बताते हैं कि राम नरेश ने अपने मकान के लिए गांव निवासी रामरतन से जमीन खरीदी थी। आरती और उसके परिवार का इस जमीन पर कोई हक नहीं बनता है। आपस में रिश्तेदार होने के बावजूद महिला सिपाही आरती उसे काफी परेशान करती थी।


 
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Father and two sons suicide in Lakhimpur Kheri Ram Naresh family lived a life of slavery in their own house
सुधीर ने छोड़ा सुसाइड नोट - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग लालजी का कहना है कि मकान छिन जाने की डर से राम नरेश और उसके बच्चे काफी परेशान रहा करते थे। आरती की प्रताड़ना से तंग आकर तीनों ने आत्महत्या कर ली। अब उसके घर में कोई दिया जलाने वाला तक नहीं बचा।


 
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