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'मुझे तुमसे बिछड़ना ही पड़ेगा...': सुपुर्द-ए-खाक हुए शायर फहमी बदायूंनी, लोगों ने नम आंखों से दी आखिरी विदाई

Mon, 21 Oct 2024 07:02 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 21 Oct 2024 07:02 PM IST
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Famous poet Fahmi Badayuni was laid to rest in Budaun
सुपुर्द-ए-खाक हुए शायर फहमी बदायूंनी - फोटो : अमर उजाला

मशहूर शायर पुत्तन खां फहमी बदायूंनी के शव को सोमवार को बदायूं के बिसौली कस्बे के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके इंतकाल पर साहित्यकारों ने दुख व्यक्त किया। फहमी बदायूंनी 72 साल के थे। पिछले एक माह से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। रविवार शाम को उनका निधन हो गया था। सोमवार को ईदगाह रोड पर नमाज-ए-जनाजा अदा कराई गई। ईदगाह रोड के पास कब्रिस्तान में दोपहर करीब दो बजे उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। तमाम शायर और कवि उनके जनाजे में शामिल हुए। बेटे जावेद ने पिता की कब्र को मिट्टी दी। दूसरा बेटा नावेद विदेश से नहीं आ सका। वह रूस में हैं। 

Famous poet Fahmi Badayuni was laid to rest in Budaun
मशहूर शायर फहमी बदायूंनी - फोटो : अमर उजाला

4 जनवरी 1952 को बिसौली कस्बे के मोहल्ला पठान टोला में जन्मे पुत्तन खां फहमी ने पढ़ाई करने के बाद लेखपाल की नौकरी की लेकिन नौकरी में उनका दिल नहीं लगा। इसके बाद 80 के दशक में शायरी में कदम रखा। उन्होंने पहले बिसौली व आसपास के मुशायरों में भाग लिया। एक मुशायरे में उन्होंने पढ़ा-प्यासे बच्चे पूछ रहे हैं, मछली-मछली कितना पानी, छत का हाल बता देता है, पतनालों से बहता पानी। उनका यह शेर खासा प्रसिद्ध हुआ। 

Famous poet Fahmi Badayuni was laid to rest in Budaun
मशहूर शायर फहमी बदायूंनी - फोटो : अमर उजाला

प्यासे बच्चे पूछ रहे हैं... शेर के बाद फहमी बदायूंनी का प्रदेश फिर देशभर के मुशायरों में आना जाना हो गया। एक के बाद एक उनके कई शेर खासे चर्चित हुए। उन्होंने देश में करीब 250 मुशायरों में शिरकत की। इंस्टाग्राम एप पर उनके फैन्स की संख्या लाखों में हैं। उनके दो बेटे व पत्नी हैं। उन्होंने आखिरी मुशायरा बीती होली पर लखनऊ में किया था। 

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Famous poet Fahmi Badayuni was laid to rest in Budaun
मशहूर शायर फहमी बदायूंनी का घर - फोटो : अमर उजाला
फहमी बदायूंनी ने तीन किताबें भी लिखीं। इनमें शेरी मजमूए, पांचवी सम्त और दस्तकें निगाहों की हैं। इसमें पांचवी सम्त को लोगों ने काफी पसंद किया। फहमी बदायूंनी सादगी पसंद थे, दुनिया की चकाचौंध से काफी दूर रहते थे। आज भी उनका घर काफी पुराना है। उनके शार्गिद ये शेर पढ़कर उन्हें याद करते नजर आए, हमारा हाल तुम भी पूछते हो, तुम्हें मालूम होना चाहिए था।
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Famous poet Fahmi Badayuni was laid to rest in Budaun
शायर फहमी बदायूंनी का जनाजा - फोटो : अमर उजाला
'मुझे तुमसे बिछड़ना ही पड़ेगा...'
फहमी बदायूंनी शायरी की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं रहे। आज पैबंद की जरूरत है, ये सजा है रफू न करने की...। मुझे तुमसे बिछड़ना ही पड़ेगा, मैं तुमको याद आना चाहता हूं..। फहमी साहब के ये वो शेर हैं जो इंस्टाग्राम व सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं।
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