बदायूं के सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट में 12 मार्च को घुसकर दो अधिकारियों को गोली मारने के आरोपी अजय प्रताप सिंह और उसके परिवार ने सत्ता का सहारा लेकर गांव के दो तालाबों, जो करीब 40 से 45 बीघा में कागजों में दर्ज हैं, पर कब्जा कर रखा है। इसके साथ ही किसुनी महेरा जाने वाला 40 फुट के रोड पर भी कब्जा कर रखा है। वहीं बंजर दर्ज भूमि पर 40 से 50 दुकानें बनाकर आरोपी के परिवार वालों ने पूरा मार्केट बसा लिया है।
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एचपीसीएल प्लांट में दोहरे हत्याकांड के बाद तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बताया जाता है कि आरोपी का परिवार क्षेत्र में वर्चस्व रखता है। उनके सामने गांव का कोई व्यक्ति मुंह खोलने को तैयार नहीं होता। यही वजह रही कि आज तक किसी ने इस परिवार के खिलाफ कोई शिकायत तक दर्ज नहीं कराई। जब दो अधिकारियों की हत्या प्लांट के अंदर हो गई तो तहसील प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए छह दुकानों व मकान को चिह्नित कर नोटिस तक की कार्रवाई कर दी। बावजूद इसके तीन दिन बीतने के बाद भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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एचपीसीएल प्लांट में दोहरे हत्याकांड के बाद बाहर तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्लांट से निकाले जाएंगे सैजनी गांव के कर्मचारी
एचपीसीएल के अधिकारियों ने कर्मचारियों को रखने वाली कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए हैं कि सैजनी गांव के जो भी कर्मचारी संदिग्ध भूमिका में हैं और प्लांट में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे थे, उन सभी को निकालकर नए कर्मचारी बाहर के नियुक्त किए जाएं। इसको लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं जोरों पर हैं।
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मृतक सुधीर गुप्ता की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जांच में सामने आया है कि आरोपी के परिवार के अलावा कुछ रिश्तेदार भी प्लांट में नौकरी करते पाए गए हैं। इसी के साथ ही गांव के तमाम लोग प्लांट में नौकरी करते आ रहे थे। घटना के बाद एचपीसीएल के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो यह मामला खुलकर सामने आ गया।
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आरोपी अजय प्रताप सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह भी पता लगा है कि 20 से अधिक कर्मचारी बिना ड्यूटी किए ही वेतन पा रहे थे। अब ऐसे लोगों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। इसके लिए अधिकारियों ने कार्यदायी संस्था को उन्हें प्लांट से निकालने के आदेश दिए हैं।