बरेली के फरीदपुर क्षेत्र में रामगंगा की कटरी में बुधवार को फायरिंग करने के बाद सुरेश प्रधान भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटनास्थल से रामगंगा किनारे तक खून के निशान अमर उजाला टीम को मिले। यहां तक कि जूते, घड़ी, टोपी, भाला और डंडे दूसरे दिन भी मौके पर पड़े थे। पुलिस को अंदेशा है कि सुरेश प्रधान बदायूं या मुरादाबाद के किसी अस्पताल में गुपचुप इलाज करा रहा है। कई लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। सुरेश की तलाश में आठ टीमें जुटी हैं।
जमीन कब्जाने के लिए वर्चस्व कायम रखने के लिए रायपुर हंस निवासी सुरेश प्रधान ने बुधवार को 30 से अधिक साथियों को ले जाकर रामगंगा के उस पार फरीदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गोविंदपुर में ताबड़तोड़ फायरिंग की। इसके बाद दोनों तरफ से फायरिंग हुई और तीन लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वर्चस्व की लड़ाई में हाथ में कांता व तलवार लगने से सुरेश प्रधान गंभीर रूप से घायल हैं।
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आरोपी सुरेश प्रधान
- फोटो : अमर उजाला
बताते हैं कि साथी सुरेश प्रधान को चारपाई पर उठाकर नदी के रास्ते ही निकल गए। घटनास्थल से करीब पौन किमी दूर तक दूसरे दिन भी खून के निशान इसकी गवाही दे रहे थे। खून से सना जूता, घड़ी जैसी कई चीजें मौके पर पड़ी थीं। बताया गया है कि स्टीमर से रामगंगा पार कर प्रधान अपने गांव रायपुर हंस पहुंचा और वहां से उसे कहीं इलाज के लिए ले जाया गया।
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स्टीमर में लाठियां और हथौड़ा
- फोटो : अमर उजाला
स्टीमर में मिलीं लाठियां और हथौड़ा
हिस्ट्रीशीटर सुरेश प्रधान जिस स्टीमर से वारदात को अंजाम देने गया था, पुलिस ने रायपुर हंस दिशा के रामगंगा तट से उसे बरामद कर लिया है। स्टीमर में आरोपी घायल अवस्था में आए थे, जिसकी वजह से उसमें खून भी पड़ा था। लगभग आधा दर्जन से अधिक लाठियां रखी थीं। एक भारी हथौड़ा भी रखा हुआ था।
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घटनास्थल पर पड़ी घड़ी
- फोटो : अमर उजाला
शवों के पोस्टमार्टम कराए गए तो हत्यारों की बर्बरता की कहानी सामने आई। बृहस्पतिवार देर रात करीब साढ़े दस बजे तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चली। गुल मोहम्मद का पोस्टमार्टम शाम को हुआ। उसके सिर में बाएं तरफ व गर्दन के पास धारदार हथियार से वार किए गए थे। गर्दन की नसें कटने और ज्यादा खून बहने से उसकी मौत होने की पुष्टि हुई। देर रात परमिंदर के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो उसका पेट और सीना गोलियों से छलनी मिला। देवेंद्र को दो गोली लगी थीं। एक गोली उसका भेजा उड़ा गई तो दूसरी कंधे में लगी। इनमें से एक कारतूस का कैप भी शरीर में फंसा मिला।
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परमिंदर के परिजनों के छलके आंसू
- फोटो : अमर उजाला
परमिंदर का शव देख फफके पिता
सरदार परमवीर सिंह के साथ परमिंदर के पिता दलजीत सिंह भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के साहनपुर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि परमिंदर यहां सच की खोज एकेडमी में ग्रंथी की शिक्षा लेने आया था। देवेंद्र के परिवार से कोई नहीं आया था। परमवीर सिंह ने बताया कि देवेंद्र की मां का निधन हो चुका है। जबकि पिता गंभीर बीमार हैं। इसलिए परमवीर ही उसके अभिभावक के तौर पर हैं। तीसरे घायल सुरेंद्र सिंह की हालत ठीक है।