भाजपा नेत्री और बांदा जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की हत्या में नामजद पति भाजपा नेता डॉ. दीपक सिंह गौर को दो दिन बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी भी काफी नाटकीय रही। अब डॉ. दीपक सिंह को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि इसी बीच यह खबर भी है कि शायद दीपक सिंह को पुलिस नहीं पकड़ पाती, मगर उसकी गिरफ्तारी में भी राज है। वहीं सवाल ये भी उठ रहे हैं कि आखिर दीपक दो दिन तक कहां छिपा हुआ था और उसकी किसने मदद की।
आगे पढ़ें इन सभी सवालों का जवाब....
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पति डॉ.दीपक के साथ श्वेता सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
श्वेता सिंह गौर का शव बुधवार को बंद कमरे में फंदे से टंगा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है। मृतका के पिता, भाई आदि परिजनों ने श्वेता के ससुर राजबहादुर सिंह, पति दीपक सिंह गौर, सास पुष्पा देवी और जेठ धनंजय सिंह (अधिवक्ता) के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कराया था।
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भाजपा नेता श्वेता सिंह की मौत का मामला, बेटी ने हाथ जोड़कर मांगा न्याय
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मटौंध थाना प्रभारी अर्जुन सिंह के मुताबिक, दीपक ने बांदा में किसी से पैसे मंगवाए थे। यह पैसा लेने के लिए इचौली तिराहे के पास किसी का इंतजार कर रहा था। तभी उसे गिरफ्तार कर लिया, जबकि चालक कार लेकर भाग गया। बाद में कोतवाली पुलिस ने दीपक को रिमांड मजिस्ट्रेट शालिनी के समक्ष पेश किया। यहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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श्वेता सिंह गौर की फाइल फोटो
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पुलिस अधिकारी के घर पर मिली ठौर, बसपा नेता बने माध्यम
गिरफ्तार किए जाने के बाद डॉ. दीपक सिंह गौर ने मीडिया से कहा कि मैं निर्दोष हूं। मेरी जीवन संगिनी चली गई। मैं बहुत दुखी हूं। घटना वाले दिन पत्नी से कोई विवाद नहीं हुआ। यह पूछे जाने पर कि घटना के बाद दो दिन कहां रहे? इस पर कहा कि वह बाहर था, लेकिन स्थान का जिक्र नहीं किया।
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पति और दो बेटियों के साथ श्वेता सिंह गौर
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हालांकि चर्चा है कि वह तिंदवारी क्षेत्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के यहां रहा। एक बसपा नेता उसके माध्यम रहे। उन्हीं के बताने पर दीपक ने खुद को पुलिस के हवाले किया। चर्चा इस बात की है भाजपा नेता दीपक सिंह गौर जितने दिन गायब रहते, यह मामला सुर्खियों में रहता। उनकी गिरफ्तारी के बाद से प्रकरण के ठंडा पड़ने की बात कही जा रही है।