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मुख्तार की बांदा जेल में वापसी: कैदियों में खुशी से प्रशासन चिंतित, जानिए क्यों है ऐसा...
Tue, 06 Apr 2021 09:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 06 Apr 2021 09:33 PM IST
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मुख्तार अंसारी
- फोटो : amar ujala
बांदा प्रशासन और पुलिस भले ही मुख्तार अंसारी के पुन: बांदा जेल आने पर चिंतित हो, लेकिन जेल के अंदर का माहौल इससे उलट है। सूत्रों के मुताबिक, जेल के अधिकांश बंदी व कर्मचारी बाहुबली की वापसी से खुश हैं। इसकी वजह यह बताई गई कि पिछली बार करीब 34 महीने यहां रहे मुख्तार ने बंदियों और जेल कर्मियों से किसी तरह की बदसलूकी नहीं की। बताते हैं कि त्योहारों आदि के मौके पर मुख्तार बंदियों आदि पर खास मेहरबान होता था। जेल की कैंटीन आदि से सामान खरीदकर अपने पैसे से पूड़ी-सब्जी और खीर आदि बनवाता था। जरूरतमंद बंदियों को आर्थिक मदद भी मिलती थी। इन सभी कामों ने बंदियों के दिल में मुख्तार के प्रति हमदर्दी पैदा कर दी।
मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में होगी वापसी
- फोटो : amar ujala
बांदा जेल की बैरक नंबर 15 माननीय और माफिया के लिए ही आरक्षित होकर रह गई है। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से पहले भी इस बैरक में कई बाहुबली और माननीय मेहमान बन चुके हैं। इनमें कुंडा निवासी पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभइया, प्रयागराज का पूर्व सांसद अतीक अहमद, शामली के विधायक सुरेश राणा, ग्रेटर नोएडा का अनिल दुजाना और हरियाणा का सिंहराज भाटी आदि शामिल हैं। जेल के प्रभारी अधीक्षक प्रमोद तिवारी का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से यह बैरक ठीक है।
मुख्तार अंसारी
- फोटो : amar ujala
बैरक की घेराबंदी से परेशान बंदी
मुख्तार की बैरक नंबर 15 के इर्दगिर्द जेल प्रशासन ने कंटीले तार लगाकर बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि अन्य बैरकों के बंदी इस बैरक तक न पहुंच पाएं। जेल प्रशासन ने यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से उठाया है, लेकिन अधिकांश बंदियों को यह घेराबंदी रास नहीं आ रही। सूत्रों के मुताबिक, तमाम बंदियों ने इसका विरोध भी किया है। कहा कि जब मुख्तार को दिक्कत नहीं है, तो जेल प्रशासन क्यों परेशान है।
जेल की क्षमता 558, बंद हैं 780 कैदी
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1860 में बनी बांदा जेल की क्षमता 558 बंदियों की है, लेकिन यह लगभग हमेशा ओवरलोड रहती है। मौजूदा समय में भी यहां 780 बंदी हैं। इन्हें जेल की कुल 15 बैरकों में रखा जाता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
मुख्तार की बैरक नंबर 15 के इर्दगिर्द जेल प्रशासन ने कंटीले तार लगाकर बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि अन्य बैरकों के बंदी इस बैरक तक न पहुंच पाएं। जेल प्रशासन ने यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से उठाया है, लेकिन अधिकांश बंदियों को यह घेराबंदी रास नहीं आ रही। सूत्रों के मुताबिक, तमाम बंदियों ने इसका विरोध भी किया है। कहा कि जब मुख्तार को दिक्कत नहीं है, तो जेल प्रशासन क्यों परेशान है।
जेल की क्षमता 558, बंद हैं 780 कैदी
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1860 में बनी बांदा जेल की क्षमता 558 बंदियों की है, लेकिन यह लगभग हमेशा ओवरलोड रहती है। मौजूदा समय में भी यहां 780 बंदी हैं। इन्हें जेल की कुल 15 बैरकों में रखा जाता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
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मुख्तार अंसारी
- फोटो : amar ujala
पिछली बार के डकैतों से नहीं होगा सामना
मुख्तार अंसारी को अबकी जेल में लगभग एक दर्जन दस्युओं से सामना नहीं होगा। यह सब चित्रकूट जेल भेज दिए गए हैं। पिछली बार मुख्तार अंसारी के यहां बंद होने के दौरान यह सब बांदा जेल में ही थे। इनमें दस्यु ददुआ गिरोह के राधे उर्फ सूबेदार सिंह, तहसीलदार उर्फ गोटर सिंह, रोहिणी सिंह और ठोकिया गिरोह के ज्ञान सिंह, संग्राम सिंह, रोहिणी सिंह आदि शामिल थे। अब जेल में गंभीर अपराधियों के बंदियों में बांदा शहर में पंजाब आर्मरी में पड़ी डकैती के आरोपी मुख्य रूप से हैं। इनमें मुंबई के डी-2 गैंग का सुक्का पाचा आदि मुख्य हैं।
मुख्तार अंसारी को अबकी जेल में लगभग एक दर्जन दस्युओं से सामना नहीं होगा। यह सब चित्रकूट जेल भेज दिए गए हैं। पिछली बार मुख्तार अंसारी के यहां बंद होने के दौरान यह सब बांदा जेल में ही थे। इनमें दस्यु ददुआ गिरोह के राधे उर्फ सूबेदार सिंह, तहसीलदार उर्फ गोटर सिंह, रोहिणी सिंह और ठोकिया गिरोह के ज्ञान सिंह, संग्राम सिंह, रोहिणी सिंह आदि शामिल थे। अब जेल में गंभीर अपराधियों के बंदियों में बांदा शहर में पंजाब आर्मरी में पड़ी डकैती के आरोपी मुख्य रूप से हैं। इनमें मुंबई के डी-2 गैंग का सुक्का पाचा आदि मुख्य हैं।
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मुख्तार अंसारी
- फोटो : सोशल मीडिया
पुलिस चौकी भी सुरक्षा के घेरे में
बांदा के हरदौली, जरैली कोठी, क्योटरा आदि मोहल्लों की सुरक्षा का जिम्मा संभाले जेल पुलिस चौकी भी अब घेराबंदी में हो गई है। जेल गेट के बाहर स्थित गैराज में पुलिस चौकी चल रही है। मुख्तार की आमद के मद्देनजर अब जेल सड़क किनारे स्थित पहला गेट ही आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसे में फरियादी पुलिस चौकी तक नहीं पहुंच पा रहे। उधर, मंगलवार को पुलिस की सख्ती के चलते जेल बंदियों के परिजन जरूरी सामान भी बंदियों तक पहुंचा सके। जेल कालोनी में रहने वाले परिवारों को भी दो दिन तक परिसर से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। सिर्फ स्टाफ कर्मचारी ही बाहर आ-जा रहे हैं।
बांदा के हरदौली, जरैली कोठी, क्योटरा आदि मोहल्लों की सुरक्षा का जिम्मा संभाले जेल पुलिस चौकी भी अब घेराबंदी में हो गई है। जेल गेट के बाहर स्थित गैराज में पुलिस चौकी चल रही है। मुख्तार की आमद के मद्देनजर अब जेल सड़क किनारे स्थित पहला गेट ही आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसे में फरियादी पुलिस चौकी तक नहीं पहुंच पा रहे। उधर, मंगलवार को पुलिस की सख्ती के चलते जेल बंदियों के परिजन जरूरी सामान भी बंदियों तक पहुंचा सके। जेल कालोनी में रहने वाले परिवारों को भी दो दिन तक परिसर से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। सिर्फ स्टाफ कर्मचारी ही बाहर आ-जा रहे हैं।