यूपी के बलिया जिले के दुर्जनपुर हत्याकांड का मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह आज पहली बार सुर्खियों में नहीं है। इसके पहले भी वह अपनी राजनीतिक गतिविधियों और क्षेत्रीय भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह से करीबी के कारण अक्सर चर्चा में रहा करता था।
यह विधायक की शह ही थी कि पिछले चार वर्ष से कोटे की दुकान के लिए धीरेंद्र गांव में तनाव का माहौल कायम किय हुए था। उसके रसूख और राजनीतिक पहुंच के आगे प्रशासनिक अधिकारी भी सीधे-सीधे कुछ कहने अथवा कहने से अक्सर कतराते नजर आते थे।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
- फोटो : अमर उजाला
धीरेंद्र की राजनीतिक पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े आयोजन में मौजूद रहता था। चाहे कोरोना काल में गरीबों में खाद्यान्न वितरण का मामला हो अथवा बीते वर्ष खपड़िया बाबा आश्रम परिसर में हुए सामूहिक विवाह की तैयारी रही हो।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
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धीरेंद्र हर जगह विधायक की परछाईं की तरह नजर आता रहा। यहीं कारण रहा कि वर्ष 2017 के मई माह से शुरू हुई यह रार गुरुवार को खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
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भले ही मामला कोटे की दुकान का आवंटन का रहा लेकिन हर समय आरोपी ने इसे अपने सम्मान से जोड़े रखा। जिसकी बदौलत दिन बीतते गए और मामला उलझता गया। इसमें धीरेंद्र की राजनीतिक पहुंच का ही खासा योगदान रहा।
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जब भी कोई उच्चाधिकारी मामले की परणिति तक पहुंचता कि आरोपी अपनी राजनीतिक पहुंच के दम पर उसका स्थानांतरण करा देता या फिर फाइल को ठंडे बस्ते में डलवा देता।