यूपी में सरकारी दावों में भले ही अपराध का ग्राफ कम हो रहा है, लेकिन बीते कुछ महीनों में कानपुर के विकास दुबे और हाथरस कांड के बाद अब बलिया हत्याकांड से खाकी के इकबाल और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह के बड़े भाई देवेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।
गिरफ्तारी के बारे में बात करते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक आजमगढ़ सुभाष चंद दुबे ने बताया कि दुर्जनपुर कांड में मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह के बड़े भाई देवेंद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा है कि मुख्य आरोपी समेत अन्य आरोपियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, रेवती थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव के पंचायत भवन में गुरुवार को कोटे की दुकान के चयन के लिए खुली बैठक में एसडीएम, सीओ, एसओ व अन्य पुलिसकर्मियों के सामने भाजपा कार्यकर्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
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इस दौरान ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे भी चले। इसमें छह लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले में धीरेंद्र समेत आठ नामजद और 25 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एसडीएम, सीओ के अलावा मौके पर मौजूद 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गिरफ्त में आए आरोपी धीरेंद्र को पुलिसकर्मियों ने छोड़ दिया।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
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पंचायत भवन के बाहर टेंट लगाकर हनुमानगंज और दुर्जनपुर की कोटे की दुकानों के चयन के लिए दोपहर बाद लगभग साढ़े तीन बजे खुली बैठक की जा रही थी। चार महिला समूहों ने आवेदन किया था। दुर्जनपुर की दुकान के लिए मां शायर जगदंबा और शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह के बीच मतदान की नौबत आ गई।
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बलिया हत्याकांड में बयान देते एसपी
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इस पर एसडीएम सुरेश कुमार पाल, सीओ चंद्रकेश सिंह और एसओ प्रवीण कुमार सिंह ने व्यवस्था बनाई कि जिसके पास आधार कार्ड अथवा अन्य कोई पहचान पत्र होगा, वही वोट कर पाएगा। एक पक्ष के लोग आधार कार्ड लेकर आए थे। दूसरे पक्ष के लोगों के पास पहचान पत्र नहीं था। इसी बात पर हंगामा हो गया।