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बलिया हत्याकांड: तस्वीरें बयां कर रहीं अधिकारियों की लापरवाही की हकीकत, 4 साल पहले लिखी गई थी पटकथा

Fri, 16 Oct 2020 09:27 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 16 Oct 2020 09:27 AM IST
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Ballia massacre: reality of negligence of officers telling photos
आरोपी को पकड़ती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

बीते चार सालों से बलिया जिले के दुुर्जनपुर गांव में विवाद का कारण रही कोटे की दुकान गुरुवार को लहू की प्यासी नजर आई। जिसमें न सिर्फ एक को अपनी जान गंवानी पड़ी, बल्कि आधा दर्जन को अपना रक्त भी बहाना पड़ा। इतना सबकुछ इतनी तेजी से घटित हुआ कि न तो प्रशासन को कुछ करने का मौका मिला और ना ही ग्रामीणों को संभलने का अवसर नसीब हुआ।



हालांकि, खूनी संघर्ष अनायास व अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी पटकथा करीब चार वर्ष पूर्व से लिखी जा रही थी। इसे जिंदा रखने के लिए शासन और सत्ता ने समय-समय पर अहम किरदार अदा किया। अलबत्ता, दुकान के आंवटन के लिए गांव के पंचायत भवन में हुई बैठक तो बेनतीजा समाप्त हो गई, लेकिन मौत अपना निशां जरुर छोड़ गई। 

Ballia massacre: reality of negligence of officers telling photos
भाजपा विधायक के साथ राशन वितरित करता बलिया हत्याकांड का आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विकास खण्ड बैरिया अंतर्गत दुर्जनपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत दो सस्ते गल्ले की दुकान के कारण गांव में विगत चार वर्षों से तनाव था। विधानसभा चुनाव के बाद बैरिया विधायक सुरेंंद्र सिंह के कार्यकर्ता धीरेंद्र सिंह डब्लू व पूर्व प्रधान नथुनी यादव वैगरह कोटे की दुकान की शिकायत में जुट गए। इससे दुर्जनपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत केंंद्र हनुमानगंज के अजय कुमार यादव की दुकान 22 मई 2017 को निलंबित कर दी गई।

Ballia massacre: reality of negligence of officers telling photos
घटनास्थल से आरोपी को पकड़ती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

केंद्र दुर्जनपुर के रामकुमार राम की दुकान 12 अप्रैल 2019 को निलंबित की गई। दोनों दुकानों को एक सितंबर 2017 को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद दोनों दुकानों का मामला मंडलायुक्त आजमगढ़ के यहां चला गया।

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Ballia massacre: reality of negligence of officers telling photos
बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट - फोटो : अमर उजाला

सुनवाई के दौरान तत्कालीन मंडलायुक्त ने दोनों दुकानों पर एसडीएम को पुन: विचार करने का आदेश दिया था। जांच के दौरान तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक सूर्यकुमार पुष्कर ने दुकान को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन राजनैतिक दबाव में तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक सूर्यकुमार पुष्कर का स्थानांतरण कर पूर्ति निरीक्षक श्यामनाथ को बैरिया में तैनात करने के बाद उन्हें व तहसीलदार को जांच का जिम्मा सौंप दिया गया।

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Ballia massacre: reality of negligence of officers telling photos
बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट - फोटो : अमर उजाला

एक बार फिर दोनों दुकानों को निरस्त कर दिया गया। फिलहाल दोनों दुकानें उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसके बाद से ही अपने पक्ष के लोगों को नई दुकान चयन की राजनीति शुरू हुई। पूर्व में तीन बार दुकान चयन की बैठक निरस्त होने के बाद पिछले 28 सितंबर को बैठक हुई थी, लेकिन तनाव को देखते हुए खण्ड विकास अधिकारी गजेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक स्थगित कर दी थी।

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