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Bahraich Violence: बहराइच में 41 साल पहले भी अक्तूबर में भड़की थी हिंसा... इस वजह से चली थीं अंधाधुंध गोलियां
Sat, 19 Oct 2024 01:29 PM IST
शाहरुख खान
अभिषेक राज श्रीवास्तव, अमर उजाला, बहराइच
अभिषेक राज श्रीवास्तव, अमर उजाला, बहराइच
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 19 Oct 2024 01:29 PM IST
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Bahraich Violence
- फोटो : अमर उजाला
बहराइच के महराजगंज कस्बे में बीते रविवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के दौरान पथराव के बाद रेहुवा निवासी रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हिंसा की यह आग धीरे-धीरे पूरे जिले में फैली। लोगों के घर जले। रिश्ते झुलसे। तपिश सद्भाव तक भी पहुंची। चार दिनों तक जनजीवन प्रभावित रहा। लोग घरों में कैद रहे। आज से 41 वर्ष पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ था।
Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
पंचायत की तैयारी और पथराव
25 अक्तूबर 1983 की सुबह बाकी दिनों से कुछ अलग थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी विवाद सुलझाने के लिए दोनों समुदायों के लोगों के साथ ब्रह्मपुरी मोहल्ले में बैठक करने पहुंचे थे।
सुलह की कवायद शुरू होने से पहले ही एक व्यक्ति ने लोगों को भड़काकर अधिकारियों पर पथराव शुरू करा दिया। पुलिस ने किसी तरह से अधिकारियों को मौके से सुरक्षित निकाला।
25 अक्तूबर 1983 की सुबह बाकी दिनों से कुछ अलग थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी विवाद सुलझाने के लिए दोनों समुदायों के लोगों के साथ ब्रह्मपुरी मोहल्ले में बैठक करने पहुंचे थे।
सुलह की कवायद शुरू होने से पहले ही एक व्यक्ति ने लोगों को भड़काकर अधिकारियों पर पथराव शुरू करा दिया। पुलिस ने किसी तरह से अधिकारियों को मौके से सुरक्षित निकाला।
Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस पर तमंचों से फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में दो हुए थे ढेर
भीड़ मोहल्ले के ही एक वकील के घर जमा हो गई। नारेबाजी के बाद पथराव शुरू हो गया। पुलिस पहुंची तो उत्तेजित लोगों ने तमंचों से फायरिंग शुरू कर दी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें दो व्यक्तियों की मौत हो गई।
बाद में पुलिस ने वकील को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद करीब 15 दिनों तक जगह-जगह हिंसा और आगजनी होती रही। मामला बढ़ता देख फैजाबाद रेंज के तत्कालीन डीआईजी ने मोर्चा संभाला और फिर कर्फ्यू लगा दिया गया।
भीड़ मोहल्ले के ही एक वकील के घर जमा हो गई। नारेबाजी के बाद पथराव शुरू हो गया। पुलिस पहुंची तो उत्तेजित लोगों ने तमंचों से फायरिंग शुरू कर दी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें दो व्यक्तियों की मौत हो गई।
बाद में पुलिस ने वकील को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद करीब 15 दिनों तक जगह-जगह हिंसा और आगजनी होती रही। मामला बढ़ता देख फैजाबाद रेंज के तत्कालीन डीआईजी ने मोर्चा संभाला और फिर कर्फ्यू लगा दिया गया।
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Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
1975 से चल रहा था विवाद
दो समुदायों में जमीन को लेकर विवाद करीब 1975 से चल रहा था। इस बीच अक्तूबर 1985 में जमीन के एक हिस्से में बनी मस्जिद पर निर्माण शुरू करा दिया गया। इसपर दूसरे पक्ष ने अदालत से स्थगन आदेश ले लिया। दूसरे पक्ष ने विवादित भूमि में बने कुएं के पास शिवलिंग की स्थापना कर दी। इसपर प्रशासन ने संबंधित भूमि को कुर्क कर दिया। लेकिन विवाद नहीं थमा। इसपर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों समुदायों के वरिष्ठ लोगों से बातचीत कर सुलह का प्रयास किया। लेकिन यह संभव नहीं हो सका।
दो समुदायों में जमीन को लेकर विवाद करीब 1975 से चल रहा था। इस बीच अक्तूबर 1985 में जमीन के एक हिस्से में बनी मस्जिद पर निर्माण शुरू करा दिया गया। इसपर दूसरे पक्ष ने अदालत से स्थगन आदेश ले लिया। दूसरे पक्ष ने विवादित भूमि में बने कुएं के पास शिवलिंग की स्थापना कर दी। इसपर प्रशासन ने संबंधित भूमि को कुर्क कर दिया। लेकिन विवाद नहीं थमा। इसपर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों समुदायों के वरिष्ठ लोगों से बातचीत कर सुलह का प्रयास किया। लेकिन यह संभव नहीं हो सका।
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bahraich communal violence
- फोटो : अमर उजाला
क्या है पूरा मामला
बहराइच की महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में बीते रविवार शाम को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा में गाने को लेकर हुए विवाद के बाद दूसरे समुदाय के युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे दुर्गा प्रतिमा खंडित होने पर पूजा समिति के सदस्यों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया तो दूसरे समुदाय के लोगों ने रामगोपाल मिश्रा (24) की हत्या कर दी।
घटना का पूरे जिले में विरोध शुरू हो गया था। विसर्जन कमेटी के लोगों ने बहराइच-सीतापुर हाईवे पर चहलारी घाट पुल के पास जाम लगा प्रदर्शन शुरू कर दिया। बहराइच-लखनऊ हाईवे भी जाम कर दिया गया। पुलिस-प्रशासन की नाकामी से ही बहराइच में हिंसा भड़की। प्रतिमा विसर्जन के दिन सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी थे।
बहराइच की महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में बीते रविवार शाम को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा में गाने को लेकर हुए विवाद के बाद दूसरे समुदाय के युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे दुर्गा प्रतिमा खंडित होने पर पूजा समिति के सदस्यों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया तो दूसरे समुदाय के लोगों ने रामगोपाल मिश्रा (24) की हत्या कर दी।
घटना का पूरे जिले में विरोध शुरू हो गया था। विसर्जन कमेटी के लोगों ने बहराइच-सीतापुर हाईवे पर चहलारी घाट पुल के पास जाम लगा प्रदर्शन शुरू कर दिया। बहराइच-लखनऊ हाईवे भी जाम कर दिया गया। पुलिस-प्रशासन की नाकामी से ही बहराइच में हिंसा भड़की। प्रतिमा विसर्जन के दिन सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी थे।