Pics: अटल बिहारी वाजपेयी ने यूपी के इस गांव में खाए थे आम, फिर जिंदगी भर नहीं भूले स्वाद
चाचा जावेद फरीदी ने दावत-ए-आम के लिए किया था आमंत्रित
रटौल के पूर्व प्रधान जुनैद फरीदी के चाचा जावेद फरीदी ने वर्ष 1993 में आम की दावत में अटल बिहारी वाजपेयी को बुलाया था। ग्रामीण बताते हैं कि रटौल पहुंचकर वह लोगों से बेहद अच्छे से मिले और बातचीत की थी। रटौल के कई आमों की वैरायटी उन्हें पसंद आई। दोबारा दावत खाने तो नहीं आए,लेकिन हमेशा आम उनके आवास पर भिजवाया गया। वाजपेयी ने अपने दिल्ली और अन्य शहरों के साथियों को भी रटौल गांव का आम खिलाया। वह मिलनसार स्वभाव के थे। आम की दावत में शामिल रहे पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री सोमपाल शास्त्री बताते हैं कि वह बेहद मिलनसार थे और लोगों के बीच घुल मिल जाते थे।
जब-जब बागपत ने बुलाया, गले लगाने आए अटल
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बड़ौत आना-जाना लगा रहा। चुनाव के अलावा व्यक्तिगत बुलावों पर भी वह यहां पर जरूर आते थे। तुगाना,बड़ौत के अलावा आसपास के गांव में उनका आना जाना लगा रहा। बड़ौत में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गी वाजपेयी करीब 15 बार आए। जब अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के नेता थे तो 1974 में वे बागपत से जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राम प्यारे पांडे के चुनाव में आए थे और संजय मूर्ति पर विशाल जनसभा को सम्बोधित किया था। विदेश मंत्री रहते हुए 1977 में संजय मूर्ति पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के तत्काल नगरध्यक्ष विनोद कुमार जैन एडवोकेट द्वारा आयोजित सभा में आए थे और नेहरू मूति पर विशाल जनसभा को सम्बोधित किया था।
बीजेपी के अध्यक्ष बनने के बाद आए थे बड़ौत
इसके बाद 1980 में भारतीय जनता के पार्टी के संस्थापक व अध्यक्ष बनने के बाद बड़ौत नगर में आए थे। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए 1998 में जनता वैदिक कॉलेज में दो बार आए तथा चौधरी दिलीप सिंह की मूर्ति का अनावरण किया था। उनके करीबी रहे विनोद जैन एडवोकेट बताते है कि इसके बाद अटल बिहारी वाजेपयी का नाता घर जैसा रहा। कार्यकर्ताओं के बुलाने पर समय-समय पर उनके बीच आते रहे। उनका कार्यकर्ताओं के प्रति काफी लगाव था और उनकी सुनते भी थे। 1998 व 2002 में वेदप्रकाश तोमर के विधान सभा चुनाव में भी जैन कॉलेज मे विशाल जनसभा को सम्बोधित किया था तथा छपरौली में विदेश मंत्री पद पर रहते हुए जैन गल्र्स ड्रिग्री कॉलेज में आए थे।
देशपाल के घर गए और गले लगा लिया
तुगाना गांव निवासी बुजुर्ग देशपाल चौहान बताते हैं कि जब वह रालोद में थे, तब उन्होंने भाजपा में शामिल होने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखा। वाजपेयी ने उन्हें दिल्ली बुलाया। चौहान ने अपने आवास पर बुलावा दिया। बड़ौत में एक जनसभा में शामिल होने आए वाजपेयी उनके आवास पर पहुंच गए। उन्हें गले लगाया और उनके घर के हैंडपंप का पानी पिया। इसके बाद उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया। चौहान कहते हैं कि उन जैसा नेता दूसरा होने वाला नहीं है।
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