सरहद की हिफाजत से लेकर शिक्षा, चिकित्सा और न्याय के क्षेत्र में दखल रखने वाली महिलाएं धर्म-अध्यात्म में पुरुषों से आगे निकल गई हैं। इन दिनों इसका सबसे बड़ा उदाहरण संगम तट पर बसा माघ मेला बन गया है। इस माघ मेले में आए प्रमुख संतों के शिविरों में रामकथा, श्रीमद्भागवत या फिर पुराणों की कथाओं की व्यास युवतियां हैं। कथाएं इनके लिए रोजगार का अहम जरिया ही नहीं, गरिमा और सम्मान का माध्यम भी हैं। अलग-अलग संत परंपरा की ये कथा व्यास महिलाएं राम-कृष्ण के आदर्शों और उनकी लीलाओं से जुड़े प्रसंगों पर संगीतमय प्रवचन से समाज में प्रेम, करुणा, दया का भाव जगाकर भीड़ बटोर रही हैं।
भक्ति की राह पर युवतियां, तेजी से बढ़ रहा कथा व्यास बनने का क्रेज
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माघ मेले में महिला कथा वाचिकाओं का ग्लैमर देखते बन रहा है। भक्तिमार्गी परंपराओं से जुड़े मठों की शिष्याएं माथे पर तिलक और गले में रुद्राक्ष, स्फटिक और तुलसी की मालाएं पहन कर व्यास पीठों पर राम-कृष्ण की कथाओं का गान कर रही हैं। इसमें संत कृपालु जी महाराज के अलावा कई संतों की शिष्याएं शामिल हैं। त्रिवेणी मार्ग स्थित नैमिषारण्य मठ के शिविर में मथुरा से आईं साध्वी तृप्ति शाम चार से छह बजे तक जब व्यास पीठ पर संगीतमय भागवत कथा का वाचन करती हैं तो पंडाल में बैठने के लिए जगह नहीं बचती। इसी तरह खाक चौक स्थित मोरपंखी के शिविर में काशी की देवी प्रतिमा प्रियदर्शिनी भी सुबह शाम रामकथा से संतों-भक्तों का ध्यान खींच रही हैं।
वजह कथा के बीच में संगीतमय भजनों पर जब सुर लगाती हैं तो लोग भक्तिभाव में डूब कर झूमने-थिरकने लगते हैं। स्वामी अधोक्षजानंद के शिविर में मानस मंजरी कुमारी शाकंभरी की कथा सुनने के लिए दोपहर से ही पंडाल में भीड़ लगने लगती है। इसी तरह हरिप्रिया किशोरी, साध्वी प्रेमतयना समेत दो दर्जन से अधिक युवतियां संतों के शिविरों में इस बार कथा व्यास बनी हैं। सेक्टर पांच के दंडीबाड़ा में दंडी स्वामी प्रबंध समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेव महाराज के पंडाल में चित्रकूट के स्वामी रामभद्राचार्य की शिष्या मानस चातकी वैदेही की कथा भी नौ दिन तक आकर्षण का केंद्र बनी रही। सुल्तानपुर की वैदेही का इस बार शिविर भी लगा है।
स्वामी विमलदेव महाराज कहते हैं कि इस दौर में कथा वाचन के क्षेत्र में युवतियां अधिक आ रही हैं। उनकी कथा सुनने के लिए लोगों की भीड़ भी अच्छी हो जाती है। बाकी पुरुष कथा वाचकों के पंडाल सूने ही रह जाते हैं। इसीलिए वह पिछले कई वर्षों से महिला कथा वाचक को ही बुला रहे हैं।