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UPPSC : क्रिकेट के डकवर्थ लुईस जैसा है आयोग का नॉर्मलाइजेशन, दो दिन परीक्षा कराने पर उठे कई सवाल

Thu, 07 Nov 2024 11:54 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 07 Nov 2024 11:54 AM IST
सार

नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया केवल पीसीएस और आरओ/एआरओ तक ही सीमित नहीं है। आयोग ने उन परीक्षाओं में भी नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है, जो विभिन्न पालियों में आयोजित की जाएंगी।

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UPPSC: Commission's normalization is like Duckworth Lewis
यूपीपीएससी, UPPSC - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा और आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा दो दिन कराए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों की ओर से कई सवाल उठाए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके लिए नॉर्मलाइजेशन क्रिकेट के डकवर्थ लुईस नियम जैसा है, जिसमें सफल और असफल को कभी समझ ही नहीं आएगा कि उसकी सफलता और असफलता का आधार क्या है।

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नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया केवल पीसीएस और आरओ/एआरओ तक ही सीमित नहीं है। आयोग ने उन परीक्षाओं में भी नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है, जो विभिन्न पालियों में आयोजित की जाएंगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती, खंड शिक्षा अधिकारी भर्ती में लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं, सो इन परीक्षाओं में भी नॉर्मलाइेजशन की प्रक्रिया लागू होगी।
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अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि यूपीपीएससी अब तक कभी भी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा का शुद्ध प्रश्नपत्र नहीं बना सका। कभी दो से तीन तो कभी आठ प्रश्न तक गलत पूछ लिए जाते हैं। परीक्षा अलग-अलग शिफ्ट में होगी और अगर कुछ प्रश्न गलत आते हैं तो नॉर्मलाइजेशन फ्लॉप हो जाएगा। ऐसे में अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में जाएंगे और भर्तियां फंसेंगी।
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प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि आयोग ने नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था लागू करके विधिक समस्या उत्पन्न करने का एक रास्ता खोल दिया है। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग गई है कि प्रारंभिक परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन पर रोक लगाएं और सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही शिफ्ट में संपन्न कराने के लिए आयोग को अफसरों को दिशाा-निर्देश जारी करें।

अभ्यर्थियों के लिए सफलता का आकलन भी होगा मुश्किल

अभ्यर्थियों का कहना है कि नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था लागू होने से परीक्षा देने के बाद वह सफलता-असफलता का आकलन भी ठीक से नहीं कर सकेंगे। अब तक परीक्षा के बाद एक-दूसरे से प्रश्नों को मिलान करके या कोचिंग संस्थानों की ओर से जारी होने वाली उत्तरकुंजी से मिलान करके यह अंदाज लगा लिया जाता था कि परीक्षा में कितने अंक मिलेंगे और मेरिट कहां तक जा सकती है। नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था लागू होने से पर्सेंटाइल स्कोर के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए मेरिट का अनुमान लगा पाना काफी मुुश्किल होगा और परिणाम घोषित होने के बाद भी वह असमंजस की स्थिति में ही होंगे।

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