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कोविड 19 से निपटने का ब्लू प्रिंट पेश करे यूपी सरकारः हाईकोर्ट

Thu, 18 Jun 2020 10:10 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 18 Jun 2020 10:10 PM IST
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UP government should present blue print to deal with Covid 19: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट का कहना है कि घर से बाहर निकलने वाला हर व्यक्ति संक्रमण होने के भय में जी रहा है। कोर्ट ने कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य सरकार के उठाए गए कदमों की सराहना की मगर, कहा कि यह कोशिशें नाकाफी हैं। अदालत ने प्रदेश सरकार को कई सुझाव दिए हैं साथ ही कोरोना से निपटने के लिए किए जा रहे कार्यों का ब्लू प्रिंट पेश करने के लिए कहा है।



कोर्ट का कहना है कि बाहर निकला कौन सा व्यक्ति कोरोना पाजिटिव है, इसका पता लगाया जाना जरूरी है। मास्क व सेनेटाइजर के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराना जरूरी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे अस्पतालों व क्वारंटीन सेंटरों की सुविधाओं की निगरानी के लिए दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

UP government should present blue print to deal with Covid 19: High Court
हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा है कि केवल उसी व्यक्ति को बाहर जाने की छूट हो जो जांच में संक्रमित न पाया गया हो। कोर्ट ने कहा है कि सिस्टमेटिक टेस्टिंग बढ़ानी होगी। प्रयागराज को सैंपल के रूप में लेकर वार्डवार प्रत्येक परिवार के काम से बाहर निकलने वाले एक व्यक्ति की जांच की जाए।

पाजिटिव पाए जाने पर परिवार को घर में या सेंटर पर क्वारंटीन किया जाए। प्रत्येक पांच वार्ड पर कोरोना जांच की व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने सहायक सालीसिटर जनरल से आईसीएमआर (इंडियन काउन्सिल फॉर मेडिकल रिसर्च) से जांच मशीनें वार्डों में स्थापित करने के संबंध में जानकारी लेने को कहा है। इससे पहले कोर्ट ने सरकार से टेस्टिंग में खर्च की जानकारी मांगी थी।

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न्यायालय - फोटो : file photo

जांच में प्रति व्यक्ति ढाई हजार रुपये का खर्च

अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि एक व्यक्ति की जांच में ढाई हजार रुपये का खर्च आएगा। अभी तक 9463756 घरों में जांच के लिए पहुंच सके हैं। 48271852 लोगों से संपर्क किया जा सका है। प्रदेश में कोरोना पीड़ितों के बेहतर इलाज व टेस्टिंग  के लिए 1865 अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। 17.6 लाख मजदूरों के टेस्ट किए गए हैं। जिसमे से 3950 कोरोना पाजिटिव पाए गए हैं। जिनका इलाज चल रहा है। 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट

सिस्टमेटिक टेस्टिंग का सुझाव

अदालत ने सरकार को सिस्टमेटिक टेस्टिंग करने का सुझाव दिया है। इसके तहत परिवार के एक व्यक्ति की जांच घर पर जाकर की जाए। क्योंकि सेंटर पर लोगों को बुलाने से भीड़ बढ़ने की आशंका है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार या प्राइवेट कंपनी से वेतन ले रहे लोग अपनी जांच के साथ एक आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति की जांच का खर्च उठाएं। व्यापारी, उद्योगपति सरकार को आर्थिक सहायता दें और सरकार उन्हें टैक्स में छूट दे।

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हाइकोर्ट
गरीबों की जांच सरकार खर्च उठाए और उनके इलाज की व्यवस्था करे। इस दौरान प्रयागराज शहर में बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की जांच की जाए। वार्ड वार सूची तैयार की जाए तथा 15 दिन बाद दुबारा जांच हो। इसके बाद एक महीने बाद जांच की जाए। कोर्ट ने कहा है कि सरकार सुझावों पर विचार करे और अमल में लाने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर कार्यवाही करे। यदि प्रयागराज में प्रयोग सफल होता है तो इसे सभी जिलों में लागू किया जाए। याचिका की सुनवाई 25 जून को होगी।
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