इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट का कहना है कि घर से बाहर निकलने वाला हर व्यक्ति संक्रमण होने के भय में जी रहा है। कोर्ट ने कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य सरकार के उठाए गए कदमों की सराहना की मगर, कहा कि यह कोशिशें नाकाफी हैं। अदालत ने प्रदेश सरकार को कई सुझाव दिए हैं साथ ही कोरोना से निपटने के लिए किए जा रहे कार्यों का ब्लू प्रिंट पेश करने के लिए कहा है।
कोविड 19 से निपटने का ब्लू प्रिंट पेश करे यूपी सरकारः हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा है कि केवल उसी व्यक्ति को बाहर जाने की छूट हो जो जांच में संक्रमित न पाया गया हो। कोर्ट ने कहा है कि सिस्टमेटिक टेस्टिंग बढ़ानी होगी। प्रयागराज को सैंपल के रूप में लेकर वार्डवार प्रत्येक परिवार के काम से बाहर निकलने वाले एक व्यक्ति की जांच की जाए।
पाजिटिव पाए जाने पर परिवार को घर में या सेंटर पर क्वारंटीन किया जाए। प्रत्येक पांच वार्ड पर कोरोना जांच की व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने सहायक सालीसिटर जनरल से आईसीएमआर (इंडियन काउन्सिल फॉर मेडिकल रिसर्च) से जांच मशीनें वार्डों में स्थापित करने के संबंध में जानकारी लेने को कहा है। इससे पहले कोर्ट ने सरकार से टेस्टिंग में खर्च की जानकारी मांगी थी।
जांच में प्रति व्यक्ति ढाई हजार रुपये का खर्च
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि एक व्यक्ति की जांच में ढाई हजार रुपये का खर्च आएगा। अभी तक 9463756 घरों में जांच के लिए पहुंच सके हैं। 48271852 लोगों से संपर्क किया जा सका है। प्रदेश में कोरोना पीड़ितों के बेहतर इलाज व टेस्टिंग के लिए 1865 अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। 17.6 लाख मजदूरों के टेस्ट किए गए हैं। जिसमे से 3950 कोरोना पाजिटिव पाए गए हैं। जिनका इलाज चल रहा है।
सिस्टमेटिक टेस्टिंग का सुझाव
अदालत ने सरकार को सिस्टमेटिक टेस्टिंग करने का सुझाव दिया है। इसके तहत परिवार के एक व्यक्ति की जांच घर पर जाकर की जाए। क्योंकि सेंटर पर लोगों को बुलाने से भीड़ बढ़ने की आशंका है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार या प्राइवेट कंपनी से वेतन ले रहे लोग अपनी जांच के साथ एक आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति की जांच का खर्च उठाएं। व्यापारी, उद्योगपति सरकार को आर्थिक सहायता दें और सरकार उन्हें टैक्स में छूट दे।