सांस्कृतिक कुंभ के तहत शाम चार पंडालों में ठुमरी-दादरा के स्वरों की लोच से लेकर नृत्य के भावों और लीलाओं की प्रस्तुतियां देश-दुनिया से आए संतों-भक्तों के लिए यादगार बनीं। पं. विश्वमोहन भट्ट की मोहन वीणा के तारों पर स्वर लहरी गूंजी तो उप शास्त्रीय गायिका कुमुद दीवान ने ठुमरी से मन मोहा। थाईलेंड के कलाकारों ने रामलीला के मंचन से इस सांस्कृतिक संगम में चार चांद लगा दिया।
मेला क्षेत्र में स्थापित सांस्कृतिक पंडाल देश- विदेश से आए अतिथियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। सेक्टर- चार स्थित अक्षयवट के पंडाल में पं. छन्नूलाल मिश्र की शिष्या कुमुद दीवान ने ठुमरी के बाद दादरा की प्रस्तुति की। इनके बाद राम भारती कला केंद्र के कलाकारों ने संगीतमय रामलीला का मंचन किया। इसी तरह सेक्टर- 6 स्थित ऋषि भारद्वाज के मंच पर छत्तीसगढ़ से आईं लोक कलाकार उर्वशी साहू ने राउतनाचा, करमा और सुगा नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति की।
मानर की छाप पर करमा नृत्य की थिरकन पर दर्शक भाव-विभोर हो उठे। इसके बाद जगदलपुर से आए बस्तर बैंड ने तो धूम मचा दी। इस दल की ओर से आदिवासी रंग नामक सांगीतिक प्रस्तुति ने हर किसी का ध्यान खींचा। इसके बाद लखनऊ के लोक गायक सुरेश कुशवाहा ने भोजपुरी लोकगीतों से माहौल बनाया। जौनपुर की पारुल नंदा ने भी प्रस्तुति दी। इस मंच पर सबसे आकर्षण का केंद्र रही थाईलैंड की रामलीला। इस संगीतमय लीला में कलाकारों ने जीवंत अभिनय से वाहवाही बटोरी। यह मंचन थाईलैंड सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से किया गया।
इसी तरह सेक्टर- 17 के यमुना मंच पर हरियाणा के लोक कलाकार मनोज जाले ने हरियाणवी लोक नृत्य से मंत्रमुग्द कर दिया। पटना के कलाकार अभय सिन्हा ने बिहार के लोकनृत्य की दो प्रस्तुतियां दीं। गुलबादी सिस्टर्स का सूफी गायन सराहा गया। सेक्टर- 13 स्थित सरस्वती मंच पर उड़ीसा की कलाकार डॉ. स्नेहा समर्थ राय ने गोटिपुआ नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति की। उन्नाव के लोक गायक लखन तिवारी ने जब आल्हा गायन पेश किया तब हर तरफ से तालियों की बौछार होने लगी। सागर से आईं लोकगायिका निशा तिवारी ने नौरता बधाई प्रस्तुत की।
प्रयागराज की आइना बोस के भजनों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद इंडिजिनस नोशन एंड डिस्कवरी ऑफ इनहेरिटेड आर्ट के लखनऊ-पटना के कलाकारों की संयुक्त प्रस्तुति सराही गई। सेक्टर- चार के त्रिवेणी मंच पर पं. विश्व मोहन भट्ट की मोहन वीणा की प्रस्तुति पर लोग झूम उठे। उन्होंने शास्त्रीय और लोक धुनों का फ्यूजन पेश कर दर्शकों का दिल जीता। इनके बाद पं. रघुनंदन पनशिकर का शास्त्रीय गायन हुआ। इसी मंच पर स्पीक मैके की ओर से अनहद नाद की सांगीतिक प्रस्तुति भी दी गई।