शाहगंज में विदेशी नागरिकों के छिपकर रहने की घटना सामने आने के बाद प्रशासन के साथ ही पुलिस अफसर भी सकते में हैं। दरअसल इस घटना के पीछे कहीं न कहीं पुलिस की चूक भी एक बड़ी वजह है। इसके साथ ही स्थानीय खुफिया एजेंसी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसा न होता तो पिछले 9 दिनों से विदेशी नागरिकों के शहर में रहने की सूचना पुलिस तक पहले ही जरूर पहुंच गई होती।
# तब्लीगी जमात मामलाः पुलिस से हुई चूक, स्थानीय खुफिया एजेंसी पर भी सवाल
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नौ दिन से मुसाफिरखाने में विदेशी थे और भनक तक नहीं लगी
बड़ी बात यह है कि जिस दिन यह जनता कर्फ्यू लागू था, उसी दिन दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल सात विदेशी नागरिकों समेत नौ लोग शहर पहुंचे, लेकिन पुलिस या प्रशासन के किसी नुमाइंदे को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं, यहां पहुंचने के बाद वह बाकायदा शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार शाहगंज क्षेत्र के काटजू रोड स्थित मुसाफिरखाने में लगातार नौ दिन रहे, लेकिन न ही पुलिस और न ही स्थानीय खुफिया तंत्रों को इसकी जानकारी हो सकी।
जानकारों का कहना है कि हाई अलर्ट के इस माहौल में बाहर से आकर लगातार नौ दिनों तक बिना किसी को सूचना दिए विदेशी नागरिकों के शहर में रहने की घटना कहीं न कहीं पुलिस के साथ ही खुफिया एजेंसी कर्मियों की नाकामी को भी साबित करता है।
तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल कई लोगों के संक्रमित होने की खबरों के आने के बाद जिले में भी गहनता से हुई जांच
हालांकि एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज इसे किसी तरह की चूक का मामला नहीं मानते। उनका कहना है कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल कई लोगों के संक्रमित होने की खबरों के आने के बाद जिले में भी गहनता से जांच पड़ताल कराई गई। एलआईयू की सूचना पर ही पुलिस ने अब्दुल्लाह मस्जिद मुसाफिरखाने में छापा मारा, जिसके बाद वहां छिपकर रह रहे लोगों को पकड़ा गया।
दुआ करें, कोई न मिले संक्रमित
जानकारों का कहना है की पुलिस व खुफिया तंत्र की एक नाकामी हजारों शहरियों की जान पर भारी पड़ सकती है। दरअसल अभी पुलिस भले ही लगातार यह कह रही है कि इंडोनेशियाई नागरिकों समेत दिल्ली से आए सभी नौ लोग खाना खाने के लिए भी बाहर नहीं निकलते थे। उनका खाना भी मुसाफिरखाने में ही बनता था। लेकिन अफसर यह बात पूरे विश्वास के साथ नहीं कह पा रहे हैं।
मुसाफिरखाने में रहने के दौरान इंडोनेशियाई नागरिकों समेत सभी 9 लोग कितने लोगों के संपर्क में आए, इसकी जानकारी पुलिस उनसे उगलवा नहीं सकी है। पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को इन लोगों से पूछताछ का मौका ही नहीं मिल सका। ऐसे में सभी की नजर दिल्ली से आए सभी 9 लोगों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। शहरियों को भी दुआ करनी होगी कि इनमें से एक भी व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित न मिले। अन्यथा की स्थिति में हालात बदतर हो सकते हैं।
सराय ऐक्ट में पंजीकृत नहीं मुसाफिर खाना
- खंगाले जा रहे दस्तावेज, सराय ऐक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई
इंडोनेशिया के नागरिकों के पकड़े जाने के बाद चर्चा में आए मुसाफिर खाना के पंजीकरण को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। अफसरों के अनुसार सराय ऐक्ट में उसका पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद वहां लोगों को ठहराया जा रहा था। अब दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। यदि ऐसा हुआ तो संचालक के खिलाफ सराय ऐक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
शाहगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत अब्दुल्ला मस्जिद के पास स्थित मुसाफिरखाना में छिपकर रह रहे सात इंडोनेशियाई नागरिक समेत बाहर से आए नौ लोग पकड़े गए थे। ये लोग दिल्ली स्थित निजामुद्दीन की तब्लीगी जमात में भी शामिल हुए थे। गौर करने वाली बात यह है कि वर्षों से संचालित इस मुसाफिर खाना का सराय ऐक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराने की बात सामने आ रही है। अफसरों का कहना है कि यह वक्फ बोर्ड की जमीन है, लेकिन मुसाफिरखाना के रूप में इसका पंजीकरण नहीं है। एडीएम सिटी अशोक कनौजिया का कहना है कि जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यदि पंजीकरण नहीं है तो सराय ऐक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।