प्रशासन की सख्ती और बारिश के बीच श्रमिकों एवं कर्मचारियों ने हक के लिए आवाज बुलंद की। ट्रेड यूनियनों की ओर से बुधवार को घोषित हड़ताल का बैंकों में व्यापक असर दिखा। एसबीआई को छोड़कर अन्य बैंकों की ज्यादातर शाखाओं में तालाबंदी रही और करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ। डाक विभाग समेत कई अन्य विभागों में भी काम ठप रहा। वहीं, अन्य विभागों में हड़ताल का आंशिक रहा। धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए पुलिस ने जुलूस निकालने से रोका तो श्रमिकों और कर्मचारियाें ने जगह-जगह सभाएं कीं। इस दौरान पुलिस से उनकी तीखी झड़प भी हुई।
हड़ताल : बैंकों में तालाबंदी, अन्य विभागों में आंशिक असर
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निजीकरण, सीएए के विरोध, पुरानी पेंशन की बहाली समेत अनेक मुद्दों को लेकर ट्रेन यूनियनों, श्रमिक संगठनों, केंद्रीय और राज्य कर्मचारी यूनियनों की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया था। पेंशनर्स के अलग-अलग संगठनों, किसान यूनियनों, छात्रों ने भी इसका समर्थन किया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अपने-अपने कार्यालयों को बंद कराने के बाद पीडी टंडन पार्क पर दिन में एक बजे एकत्रित होना था। उनका वहां से एजी ऑफिस तक जुलूस निकालने का भी कार्यक्रम था लेकिन, सीएए पर हुए विरोध प्रदर्शन को देखते हुए वहां पहले से भारी फोर्स तैनात रही।
एसपी सिटी तथा अन्य अफसरों ने धारा 144 लागू होने की बात करते हुए लोगों को पीडी टंडन पार्क पर एकत्रित ही नहीं होने दिया। हालांकि, सीटू के हरिश्चंद्र द्विवेदी, एलआईसी के अविनाश मिश्र, नसीम अंसारी, रामजी राय आदि नेता वहां डटे रहे। उन्होंने शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालने की मांग की लेकिन, पुलिस ने अनुमति नहीं दी। इससे नाराज अलग-अलग संगठन के प्रतिनिधियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। नेताओं ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तानाशाही करने का आरोप लगाया। इस दौरान आसपास खड़े अन्य संगठन के प्रतिनिधि तथा कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। फिर जुलूस बनाकर वे हनुमान मंदिर गेट तक गए। वहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
इसके बाद ग्रुप में बंटकर वे एजी ऑफिस पहुंचे और सभा की। एजी ऑफिस पर पहले से भी कई संगठन के लोगों का जमावड़ा था। वहां हुई सभा में हरिश्चन्द्र द्विवेदी, आल इंडिया किसान मजदूर सभा के डॉ.आशीष मित्तल, रविशंकर मिश्र, मो.जावेद, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल, ऋचा सिंह, डॉ.कमल, अजय भारती आदि ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताया। उन्होंने पुरानी पेंशन की बहाली, सरकारी विभागों के निजीकरण की प्रक्रिया बंद करने की मांग करने के साथ सीएए-एनआरसी के खिलाफ भी आवाज बुलंद की। संचालन कर रहे सुभाष पांडेय ने मांग पर विस्तार से चर्चा की। दिशा छात्र संगठन के प्रसेन, अमित आदि ने क्रांतिकारी गीत गाए। सभा में प्रमोद मिश्र, अंशु मालवीय, अखिल विकल्प, एसएस लाल, आरिज अल्वी, फ़ारूख, शैलेश पासवान, शिवानी, मिताक्षरा आदि शामिल रहे। एआईकेएमएस की ओर से ग्रामीण भारत बंद के समर्थन में जसरा नवीन मंडी परिसर में धरना दिया गया। इसमें किसानों, मजदूरों ने मांग के समर्थन में आवाज बुलंद की। धरना देने वालों में महासचिव राजकुमार पथिक, रामकैलाश कुशवाहा आदि शामिल रहे।
बैंकों में 150 करोड़ का कारोबार प्रभावित
अलग-अलग मुद्दों को लेकर बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का व्यापक असर दिखा। एसबीआई को छोड़कर अन्य बैंक की ज्यादातर शाखाएं खुली ही नहीं। इसकी वजह से करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ तथा बैंक पहुंचने वाले लोगों को निराश होना पड़ा। मर्जर एवं सुधार की प्रक्रिया पर रोक लगाने, वेतन समझौता लागू करने, पुरानी पेंशन बहाली समेत अन्य मांगों को लेकर बैंकों में कोई काम नहीं हुआ। सेंट्रल बैंक की सिविल लाइंस शाखा समेत एक-दो अन्य शाखाएं सुबह खुलीं लेकिन कर्मचारी नेताओं के हस्तक्षेप के बाद वहां भी शटर गिरा दिए गए। एसबीआई में भी अन्य काम तो हुए लेकिन अन्य बैंकों में हड़ताल की वजह से चेक फंसे रह गए।