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समाज को वटवृक्ष की जड़ों की तरह अटूट विश्वास की जरूरत: मोरारी बापू

Mon, 02 Mar 2020 01:48 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 02 Mar 2020 01:48 AM IST
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Society needs unwavering faith like the roots of the tree: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

संत मोरारी बापू ने रविवार को संगम तट पर देश-दुनिया से पहुंचे रामकथा प्रेमियों को प्रेम, विश्वास और साधुता की अमृतमयी बूंदों का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि समाज को वटवृक्ष की जड़ों की तरह अटूट विश्वास और बीजों की तरह धैर्य पैदा करने की जरूरत है।



र न पाने वाली गहराईयों तक फैली अक्षयवट की जड़ों से लेकर, घनी छाया और कभी न बिकने वाले उसके लाल फलों के अटूट विश्वास को उन्होंने रेखांकित किया। तुलसी की चौपाई- बटु विश्वास अचल निज धरमा...की उनकी व्याख्या का सार यही था कि- प्रयागराज में युगों का साक्षी अक्षयवट ही कभी न डिगने वाला अटल विश्वास है। इसी आस, विश्वास और भरोसे को लेकर भिन्न-भिन्न विचारों-मतों के लोग संगम पर आकर एक हो जाते हैं।

Society needs unwavering faith like the roots of the tree: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

अकबर के किले की अनुकृति वाले भव्य पंडाल में व्यास पीठ की पूजा के बाद मोरारी बापू ने मानस ‘अक्षयवट कथा’ को विस्तार दिया। उन्होंने वट वृक्ष की विशेषता कै वर्णन किया। बताया कि वटवृक्ष शिव रूप में विराजमान है। उसकी जटाओं से लेकर हर अंगों का हमें दर्शन करना चाहिए। वटवृक्ष के सात आयामों में विश्वास के रूपों को उन्होंने एक-एक कर गिनाया।

Society needs unwavering faith like the roots of the tree: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

बापू ने जड़, तना, शाखाओं, टहनियों, पत्तियों के अलावा उसके लाल रंग के फल और छांव को विश्वास के अंगों के रूप में अभिव्यक्त किया। बापू ने कहा कि विश्वास की जड़ें आसमान में होती है उसे कोई काट नहीं सकता। विश्वास का तना वट की तरह मजबूत होना चाहिए, जिसे कभी नष्ट नहीं किया जा सके। अपने अनुभव पर विश्वास ही वटवृक्ष की शाखाएं हैं।

टों के रूप में धरा को छूटी छोटी-छोटी टहनियां अनंत धैर्य हैं तो वट वृक्ष के लाल फल विश्वास के रूप हैं। जिस प्रकार वटवृक्ष का फल बिकता नहीं, बंटता हैस उसी प्रकार विश्वास भी बिकता नहीं, बंटता है। उसमें भी वटवृक्ष के फल के बीजों की तरह अनंत धैर्य है। वटवृक्ष की छांव का रूप भी विश्वास है। कथा के अवसर पर संयोजक मिराज ग्रुप के सीएमडी मदन पालीवाल, सपत्नीक पूर्व काशी नरेश डॉ अनंत नारायण सिंह, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, प्रकाश पुरोहित समेत तमाम लोग उपस्थित थे।

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Society needs unwavering faith like the roots of the tree: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

जहां राम भक्ति की गंगा, कर्म की यमुना और ब्रह्म विद्या की सरस्वती हो, वहीं साधु

मोरारी बापू ने कहा कि संत और साधु समाज की प्रयाग के मानस हैं। तुलसीदास ने राम चरित मानस में इन भावों को सहजतचा से व्यक्त किया है। साधु समाज हो सकता है, लेकिन कभी - कभी पूरा समाज भी साधु नहीं हो सकता। जिसमें राम भक्ति की गंगा, कर्म की यमुना और ब्रह्म विद्या की सरस्वती है, वहीं साधु है।

सांसों की माला में हरि नाम का सुमिरन

कलयुग केवल नाम अधारा...बापू ने रामनाम की महिमा का गुणगान किया। कहा कि इस युग में प्रभु का नाम ही आधार है। सांसों की माला में सिमरू हरि का नाम..भजन की पंक्तियां सुनाई तो तमाम श्रद्धालु झूमने-थिरकने लगे।

तपस्विनी से स्वर्णमयी सीता के बताए रूप

मोरारी बापू नेमानस अक्षयवट’ कथा के दौरान रामायण में सीता के विभिन्न रूपों का भी जिक्र किया। सीता के बचपन, स्वयंवर, राम के साथ विवाह के बाद अयोध्या आने, तपस्विनी सीता के तपमयी जीवन, लंका में राम के वियोग में वियोगिनी सीता, अयोध्या की महारानी के रूप में स्वर्णमयी सीता, अंत में आश्रम में रहने वाली सीता के स्वरूपों के बारे में उन्होंने बताया।
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