संत मोरारी बापू ने रविवार को संगम तट पर देश-दुनिया से पहुंचे रामकथा प्रेमियों को प्रेम, विश्वास और साधुता की अमृतमयी बूंदों का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि समाज को वटवृक्ष की जड़ों की तरह अटूट विश्वास और बीजों की तरह धैर्य पैदा करने की जरूरत है।
समाज को वटवृक्ष की जड़ों की तरह अटूट विश्वास की जरूरत: मोरारी बापू
अकबर के किले की अनुकृति वाले भव्य पंडाल में व्यास पीठ की पूजा के बाद मोरारी बापू ने मानस ‘अक्षयवट कथा’ को विस्तार दिया। उन्होंने वट वृक्ष की विशेषता कै वर्णन किया। बताया कि वटवृक्ष शिव रूप में विराजमान है। उसकी जटाओं से लेकर हर अंगों का हमें दर्शन करना चाहिए। वटवृक्ष के सात आयामों में विश्वास के रूपों को उन्होंने एक-एक कर गिनाया।
बापू ने जड़, तना, शाखाओं, टहनियों, पत्तियों के अलावा उसके लाल रंग के फल और छांव को विश्वास के अंगों के रूप में अभिव्यक्त किया। बापू ने कहा कि विश्वास की जड़ें आसमान में होती है उसे कोई काट नहीं सकता। विश्वास का तना वट की तरह मजबूत होना चाहिए, जिसे कभी नष्ट नहीं किया जा सके। अपने अनुभव पर विश्वास ही वटवृक्ष की शाखाएं हैं।
टों के रूप में धरा को छूटी छोटी-छोटी टहनियां अनंत धैर्य हैं तो वट वृक्ष के लाल फल विश्वास के रूप हैं। जिस प्रकार वटवृक्ष का फल बिकता नहीं, बंटता हैस उसी प्रकार विश्वास भी बिकता नहीं, बंटता है। उसमें भी वटवृक्ष के फल के बीजों की तरह अनंत धैर्य है। वटवृक्ष की छांव का रूप भी विश्वास है। कथा के अवसर पर संयोजक मिराज ग्रुप के सीएमडी मदन पालीवाल, सपत्नीक पूर्व काशी नरेश डॉ अनंत नारायण सिंह, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, प्रकाश पुरोहित समेत तमाम लोग उपस्थित थे।