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संत मोरारी बापू ने निषाद की बेटी के हाथ की खाई रोटी, गैर बराबरी, छूआछूत के खिलाफ दिया संदेश

Fri, 06 Mar 2020 12:00 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 06 Mar 2020 12:00 AM IST
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Saint Morari Bapu ate bread in Nishad's daughter's hand in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

मोरारी बापू ने अपनी रामकथा में नए प्रयोगों को लेकर हमेशा सुर्खियां बटोरते रहे हैं। बृहस्पतिवार को वह अचानक एक निषाद के घर पहुंच गए। वहां उन्होंने निषाद की बेटी के हाथ बना भोजन ग्रहण कर छूआछूत और गैर बराबरी के खिलाफ सामाजिक एकता, प्रेम व समरसता का संदेश दिया।

Saint Morari Bapu ate bread in Nishad's daughter's hand in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

शाम करीब छह बजे संत मोरारी बापू लवायन कला गांव जाने वाले रास्ते पर मवैयां गांव के रमेश चंद्र निषाद के घर केसामने रुक गए। सड़क केकिनारे उनकी गाड़ी रुकी तो साथ में कई गाड़ियां खड़ी हो गईं। कुछ पुलिस वाले फटाफट उतरकर आसपास खड़े हो गए। देखते-देखते लोगों की भीड़ लग गई। रमेश को लगा कि गांव में कोई घटना हो गई है, इसलिए पुलिस आ गई है।

Saint Morari Bapu ate bread in Nishad's daughter's hand in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

लोग कुछ समझ पाते तबतक पीले वस्त्र में एक संत कार से उतरे और पड़ोस के नल से पानी लेने के लिए जा रही रमेश की पुत्री शीलू निषाद से संत के लिए भिक्षा देने का आग्रह करने लगे। शीलू से संतों ने पूछा कि बिटिया भिक्षा मिल जाएगी क्या? रमेश ने बताया कि पहले उन्होंने सोचा कि आटा-दाल की भिक्षा लेकर चले जाएंगे, लेकिन कुछ ही देर में जब पता चला कि कार में बैठे संत कोई और नहीं बल्कि मोरारी बापू हैं और वह उनके घर भोजन करना चाहते हैं तो फिर उन लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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Saint Morari Bapu ate bread in Nishad's daughter's hand in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj
शीलू दौड़कर कार केपास गई और वह मोरारी बापू को बुलाकर अपने घर ले आई। बापू संतों केसाथ चारपाई पर बैठे। उन्होंने शीलू से रोटी, सब्जी तत्काल बनाकर खिलाने के लिए कहा। उन्होंने निषाद परिवार के सदस्यो से कहा कि कुछ भी मंगाने की जरूरत नहीं है। जो घर में उपलब्ध हो वही खिलाना। पीसीएस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी शीलू ने अपनी मां सावित्री के साथ मिलकर रोटी, आलू, मटर और टमाटर की सब्जी, धनिया की चटनी बनाकर भोजन की थाली परोसी। अमीन रहे रमेश की वर्षों पहले छत से गिरने की वजह से दोनों आंखों की रोशनी चली गई है। रमेश ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था, मोरारी बापू उनकी चारपाई पर बैठकर भोजन करेंगे। 
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