वाराणसी के बाद काशी तमिल संगमम के प्रतिनिधि सोमवार की सुबह प्रयागराज पहुंचे। यहां दिन भर तीर्थराज की समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास से भी वे परिचित हुए। यहां संगम की अलौकिक छटा देखकर सभी मेहमान अभिभूत हो गए। यहां कुछ ने गंगा-यमुना के पवित्र संगम में डुबकी लगाई तो कुछ ने आचमन कर हर-हर गंगे के जयकारे लगाए। शाम को सभी 215 छात्र एवं अन्य लोग राम की नगरी अयोध्या के लिए रवाना हो गए।
दरअसल केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पहल पर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक माह के लिए काशी तमिल संगमम आयोजित किया गया है। एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम को लेकर अलग-अलग कई गुटों में दक्षिण भारतीय लोगों का जत्था तमाम ट्रेनों के माध्यम से वाराणसी जाएगा।
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Prayagraj News : काशी-तमिल संगमम के प्रतिनिधियों का संगम तट पर किया गया जोरदार स्वागत।
- फोटो : अमर उजाला।
उसके बाद प्रयागराज, अयोध्या होते हुए अपने गंतव्य को रवाना होगा। दो दिन वाराणसी भ्रमण के बाद सोमवार की सुबह 11.30 बजे के आसपास अपने तयशुदा कार्यक्रम से तकरीबन डेढ़ घंटे की देरी से यह जत्था पांच बसों से संगम नगरी पहुंचा। संगम घाट पर सभी प्रतिनिधियों का जोरदार स्वागत किया गया।
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Prayagraj News : काशी-तमिल संगमम के प्रतिनिधियों का संगम तट पर किया गया जोरदार स्वागत।
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यहां पहुंचने के बाद प्रतिनिधियों को 13 मोटर वोट से स्नान कराने के लिए संगम ले जाया गया। प्रतिनिधियों ने यहां हुए स्वागत की काफी सराहना की और सरकार के प्रति आभार जताया। कहा कि सरकार की पहल के चलते ही उन्हें एक साथ यूपी के तीन महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल, काशी, प्रयागराज और अयोध्या भ्रमण का मौका मिल सका है।
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Prayagraj News : काशी-तमिल संगमम के प्रतिनिधियों का संगम तट पर किया गया जोरदार स्वागत।
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इस दल में शामिल मेहमान जो तमिलनाडु के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं उन सभी पर जीजीआईसी की छात्राओं समेत सांसद केशरी देवी पटेल, जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री, एसएसपी शैलेश पांडेय, भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी आदि ने पुष्प वर्षा भी की। तमिल के तुलसी कहे जाने वाले डी एम गोविंद राजन के साथ कई स्थानीय तमिल छात्रों ने दुभाषिया की भूमिका निभाई। संगम से विता होने के बाद इन्हें गंगाजल, सिंदूर और इलायची दाना प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।
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संगम दर्शन एवं स्नान, लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन, स्वामी नारायण मंदिर, चंद्रशेखर आजाद पार्क आदि यात्रा का हर पड़ाव इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कानून, प्रबंधन, वित्त आदि विधाओं से जुड़े विद्यार्थियों को अचंभित, आह्लादित और मुग्ध करता रहा। आजाद पार्क पहुंचने के बाद वहां लगी शहीद चंद्रशेखर की प्रतिमा को कई मेहमानों ने सलामी भी दी। दल में शामिल छात्रा जी रेखा, सुजाता आर ने कहा कि जैसा किताबों में पढ़ा वैसा ही प्रयागराज उन्होंने आज हकीकत में देखा।