अटाला में हुए बवाल के बाद उठे सवालों पर आला पुलिस अफसर लगातार दावा करते रहे कि पुलिस की ओर से मुकम्मल तैयारियां की गई थीं। लेकिन उनके दावे सवालों के घेर मे है। दरअसल शुक्रवार से कई दिनों पहले ही जुमे पर बंदी के पम्फलेट अटाला स्थित दुकानों व घरों के बाहर लगा दिए गए थे। सवाल यह है कि इसके बावजूद पुलिस को इस बात की भनक कैसे नहीं लगी। माहौल भांपने में अफसरों से कहां चूक हुई।
prayagraj violence : कानपुर बवाल के बाद ही शुरू हो गई थी प्लानिंग, पंफलेट लगने के बाद भी पुलिस को नहीं लगी भनक
शायद यही वजह थी कि जुमे पर बिना किसी घोषित बंदी के ही पुराने शहर के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। अब सवाल यह उठता है कि शासन की ओर से चेताए जाने के बाद हाई अलर्ट पर रहने और पुख्ता चौकसी बरतने का दावा करने वाले अफसरों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
बिना बंदी के ही दुकानें रहीं बंद
शायद यही वजह थी कि जुमे पर बिना किसी घोषित बंदी के ही पुराने शहर के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। अब सवाल यह उठता है कि शासन की ओर से चेताए जाने के बाद हाई अलर्ट पर रहने और पुख्ता चौकसी बरतने का दावा करने वाले अफसरों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। आखिर कैसे जुमे पर बंदी के जरिए विरोध का संदेश देने की मुहिम को आगे बढ़ाया जाता रहा और पुलिस अफसरों की ओर से इसे लेकर कोई एहतियातन कार्रवाई नहीं की गई।
जानकारों का कहना है कि अफसर लाख दावे करें लेकिन जिस तरीके से बवाल हुआ, उससे साफ है कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि किस कदर आग भड़काने की साजिश रची जा रही है। ऐसा होता तो पूरी तैयारी जुमे के दिन सिर्फ फोर्स तैनात करने तक ही सीमित न रहती। पम्फलेट लगाने वालों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया होता और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी होती।
क्या करती रहीं खुफिया एजेंसियां?
अटाला बवाल के बाद पुलिस के साथ ही खुफिया एजेंसियां भी सवालों के घेरे में हैं। दरअसल कानपुर बवाल के बाद इस बात के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सक्रिय रहें। इस बात का पता लगाएं कि कहीं किसी तरह की कोई संदिग्ध गतिविधि तो नहीं है। लेकिन आईबी की स्थानीय इकाई ही नहीं बल्कि स्थानीय अभिसूचना इकाई भी इस मामले में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। किसी को भनक ही नहीं लग पाई कि शहर का माहौल बिगाड़ने के मकसद से इतनी बड़ी साजिश रची जा रही है।
किसने दिया दगा?
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार की जा रही बैठकों पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल अफसरों की ओर से लगातार समुदाय विशेष केप्रबुद्धजनों और धर्मगुरुओं संग बैठकें की जा रही थीं। उनसे अपील की जा रही थी कि जुमे की नमाज शांतिपूर्ण और सद्भाव के साथ संपन्न कराई जाए। अफसरों ने यह भी दावे किए थे कि बैठकों में यह आश्वासन मिला है कि सौहार्र्द का माहौल कायम करने में सभी पुलिस-प्रशासन का हरसंभव सहयोग करेंगे। ऐसे में सवाल यह है कि बंदी के जरिए विरोध की आग सुलगाने की साजिश के बारे में पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी गई।
व्हाट्सएप पर जावेद फैला रहा था नफरत, शेयर किए थे मैसेज
अटाला में पथराव, बमबाजी व आगजनी की घटना का मास्टरमाइंड जावेद मोहम्मद उर्फ जावेद पंप व्हाट्सएप पर नफरत फैला रहा था। वह सोशल मीडिया के जरिये ही शहर को आग में झोंकने की साजिश रच रहा था। उसकी प्लानिंग 10 जून को भारत बंद कराने की थी और वह इस मैसेज को व्हाट्सएप के जरिये शेयर कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच पड़ताल की तो यह खुलासा हुआ। फिलहाल उसका मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजने की तैयारी की जा रही है।