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अंधविश्वास: खाने में एक बार सिर्फ लाई-चना, मंदिर जाने से परहेज, प्रयागराज के परिवार की हर हरकत हैरान करने वाली
Thu, 30 Jun 2022 12:57 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 30 Jun 2022 12:57 PM IST
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prayagraj blind faith
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज के करछना इलाके के डीहा गांव निवासी अभयराज यादव का पूरा परिवार अंधविश्वास के कुचक्र में ऐसा फंसा हुआ था कि बीते तीन माह से लाई-चना व गंगाजल ग्रहण कर जीवन बिता रहा था। लाई-चना भी दिन में केवल एक बार ही खाया करते थे। सुबह चार बजे अभयराज की बेटियां व बेटे गंगा घाट पर स्नान करने जाती थीं और वहीं बने चौरा देवी स्थान पर घंटों पूजा किया करते थे। यहां पर अभयराज की बेटियां गीत गाया करती थीं। यह देखकर गांव वाले दहशत में रहते थे। पूरा परिवार गांव के किसी मंदिर में नहीं जाया करता था। अभयराज के घर पर उसकी बेटी बीनू की ही चला करती थी। बहनें व भाई उसका कहा मानते थे। पिता और मां जब विरोध करते तो उन्हें कमरे में बंद कर दिया जाता था। घटना के कुछ दिन पहले ही एक रिश्तेदार के घर पहुंचने पर उन्हें कमरे से बाहर निकाला गया था। बेटी की मौत के बाद जब अभयराज ने अंतिम संस्कार करने को कहा तो उसे फिर से कमरे में बंद कर दिया गया।
घर के अंदर का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
तीसरे नंबर की बेटी का घर में नहीं था आना जाना
अभयराज की तीसरे नंबर की बेटी रेनू पत्नी पवन शादी के कुछ दिनों बाद तक अपने मायके आया करती थी। लेकिन बीते तीन सालों में परिवार में हो रहे अंधविश्वास के खेल को देखकर उसने अपने मायके में आना छोड़ दिया था। रेनू की शादी नैनी में हुई थी। वह न तो अपने मायके आया करती थी और न ही परिवार के सदस्यों से मतलब रखती थी।
अभयराज की तीसरे नंबर की बेटी रेनू पत्नी पवन शादी के कुछ दिनों बाद तक अपने मायके आया करती थी। लेकिन बीते तीन सालों में परिवार में हो रहे अंधविश्वास के खेल को देखकर उसने अपने मायके में आना छोड़ दिया था। रेनू की शादी नैनी में हुई थी। वह न तो अपने मायके आया करती थी और न ही परिवार के सदस्यों से मतलब रखती थी।
मौके पर जमा लोग
- फोटो : अमर उजाला
बड़ी बेटी व उसके बच्चों को परिवार ने पहुंचा दिया ससुराल
भयराज की बड़ी बेटी मीरा की शादी मेजा थाना क्षेत्र के गुनई गांव में 12 साल पहले हुई थी। वह अपने मायके अभी एक माह पहले बच्चों को लेकर आई थी और उसका भी इस झांड फूंक में काफी विश्वास रहा करता था। मीरा का पति सुनील भी अक्सर यहां रहा करता था और अपनी पत्नी व साले-सालियों के अंधविश्वास में उनका सहयोग किया करता था।
भयराज की बड़ी बेटी मीरा की शादी मेजा थाना क्षेत्र के गुनई गांव में 12 साल पहले हुई थी। वह अपने मायके अभी एक माह पहले बच्चों को लेकर आई थी और उसका भी इस झांड फूंक में काफी विश्वास रहा करता था। मीरा का पति सुनील भी अक्सर यहां रहा करता था और अपनी पत्नी व साले-सालियों के अंधविश्वास में उनका सहयोग किया करता था।
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मौके पर जमा पुलिस और ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
गांव वालों ने बताया कि सुनील मंगलवार की सुबह ही अपने घर गया था। मीरा के दो बेटी प्रीति व कीर्ति व एक बेटा प्रतीक है। भोजन न मिलने के कारण तीनों बच्चें भी कुपोषण का शिकार हो गए थे। कीर्ति की हालत तो काफी गंभीर थी और उसे पास स्थित अस्पताल में पुलिस वालों ने भर्ती कराया था।
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डीहा गांव में जुटी ग्रामीणों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
बुधवार को हालत में सुधार होने पर अभयराज के भाई के लड़कों ने मीरा व उसके बच्चों को उनकी ससुराल पहुंचा दिया। दूसरी बेटी रेखा की भी शादी मेजा थाना क्षेत्र के भुस्का गांव में हुई थी। उसके एक बेटा अर्पित व एक बेटी अर्पिता है। बीते रविवार को वह भी अपने बच्चों के साथ यहां आई थी।